नेहरू अगर जीवित होते तो कांशी राम यूपी के मुख्यमंत्री होते: राहुल गांधी

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लखनऊ, 13 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि आज अगर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो बहुजन नेता कांशी राम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते। राहुल गांधी ने कांशी राम की जयंती के मौके पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। कांग्रेस नेता ने कांशी राम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन वंचित समुदायों के लिए समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित कर दिया। उन्होंने ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस अतीत में अपनी…

लखनऊ, 13 मार्च (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि आज अगर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो बहुजन नेता कांशी राम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते।

राहुल गांधी ने कांशी राम की जयंती के मौके पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। कांग्रेस नेता ने कांशी राम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन वंचित समुदायों के लिए समानता और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित कर दिया।

उन्होंने ने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस अतीत में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह से निभाने में विफल रही थी, जिसके कारण कांशी राम जैसे नेताओं को अपना अलग राजनीतिक रास्ता चुनना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उस समय कांग्रेस ने प्रभावी ढंग से काम किया होता, तो कांशी राम को अलग से संघर्ष करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने आगे कहा कि नेहरू यह सुनिश्चित करते कि कांशी राम मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचते

कार्यक्रम के दौरान, कांशी राम के लिए भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ की मांग करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में सत्ता और संसाधन कुछ ही लोगों के हाथों में सिमटे हुए हैं।

उन्होंने लोगों से देश की नौकरशाही, कॉर्पोरेट क्षेत्र और बड़ी कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन की बनावट पर गौर करने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि इन क्षेत्रों में दलितों, अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) और आदिवासियों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, अगर आप मनरेगा श्रमिकों की सूची देखेंगे, तो आपको यही समुदाय भारी संख्या में मिलेंगे।

गांधी ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के तहत दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के लिए अवसर व्यवस्थित तरीके से कम किए जा रहे हैं, खासकर सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार के मामले में, भर्ती और इंटरव्यू प्रक्रियाओं के जरिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी समाज के सभी वर्गों को समान अवसर और उचित प्रतिनिधित्व देने में विश्वास रखती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान एक ऐसी विचारधारा को दर्शाता है जो हज़ारों सालों में बनी है और जिसमें महात्मा गांधी, डॉ. बीआर अंबेडकर और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का सार है। उन्होंने कहा कि संविधान सावरकर या गोडसे की विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करता और जो लोग उस विचारधारा को मानते हैं, वे असल में संविधान की भावना का सम्मान नहीं करते।

राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि भारतीय समाज दो हिस्सों में बंट गया है, एक 15 प्रतिशत का विशेषाधिकार प्राप्त अल्पसंख्यक वर्ग और दूसरा 85 प्रतिशत का बहुसंख्यक वर्ग, जिसमें संसाधनों और सत्ता का लाभ ज्यादातर उसी छोटे वर्ग तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय, समानता और शासन-प्रशासन में हाशिए पर पड़े समुदायों की ज्यादा भागीदारी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी।

उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “हमें ऐसी राजनीति करनी चाहिए जो समाज में बदलाव लाए। ऐसी राजनीति करें जो हिंदुस्तान के गरीबों, दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों को देश की सत्ता में शामिल होने का मौका दे।”

इससे पहले, राहुल गांधी का लखनऊ हवाई अड्डे पर राज्य कांग्रेस नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया, जिसके बाद वे कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हो गए।

–आईएएनएस

पीएसके

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