नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि यूरोपीय संघ ने अपनी संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल किया है, जिससे भारत अब यूरोपीय संघ के बाजार में जलीय कृषि उत्पादों का निर्यात जारी रख सकेगा।
भारत को प्रस्तावित रूप से शामिल करना देश के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम है और यह भारत की नियामक प्रणालियों, निगरानी तंत्रों और खाद्य सुरक्षा मानकों में यूरोपीय संघ के विश्वास को दर्शाता है।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि यूरोपीय आयोग द्वारा औपचारिक रूप से अपनाए जाने के बाद, संशोधित विनियमन से सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय मत्स्य उत्पादों का यूरोपीय संघ के बाजार में निर्बाध निर्यात सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
यूरोपीय संघ भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात के लिए प्रमुख गंतव्यों में से एक है। वर्ष 2025-26 में यह भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों का तीसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा, जिसमें कुल निर्यात मूल्य 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया और यूरोपीय संघ का इसमें योगदान 18.94 प्रतिशत रहा।
वर्ष 2024-25 की तुलना में यूरोपीय संघ को निर्यात में मजबूत वृद्धि देखी गई, जिसमें निर्यात मूल्य में 41.45 प्रतिशत और निर्यात मात्रा में 38.29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसमें फार्म में पाली गई झींगा मछलियों का निर्यात की सबसे अधिक हिस्सेदारी थी।
यूरोपीय संघ के इस कदम का उद्देश्य 4 अक्टूबर 2024 को जारी कार्यान्वयन विनियमन (ईयू) में हुई चूक से उत्पन्न चिंताओं को हल करना है। पहले के विनियमन में भारत उन तृतीय देशों की सूची में शामिल नहीं था, जिन्हें सितंबर 2026 से मानव उपभोग के लिए पशु मूल के उत्पादों का निर्यात करने की अनुमति दी गई थी।
यूरोपीय आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि इस संशोधित सूची में केवल उन्हीं देशों को शामिल किया गया है जिन्होंने खाद्य उत्पादन में उपयोग होने वाले जानवरों पर रोगाणुरोधी उपयोग का यूरोपीय प्रतिबंध प्रभावी रूप से लागू किया है। इन देशों ने यूरोपीय संघ के नियमों के तहत आवश्यक गारंटी और भरोसेमंद आश्वासन भी प्रदान किए हैं।
मंत्रालय ने कहा कि इस घटनाक्रम को वाणिज्य विभाग, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) और निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) जैसे संगठनों द्वारा नियामक अनुपालन को सुदृढ़ करने और जिम्मेदार मत्स्यपालन नियमों को बढ़ावा देने के लिए किए गए लगातार प्रयासों की मान्यता के रूप में भी देखा जा सकता है।
–आईएएनएस
एबीएस/
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