वित्त वर्ष 2031 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता करीब छह गुना बढ़कर 10.5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद: रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर की क्षमता वित्त वर्ष 2031 तक लगभग 6 गुना बढ़कर 1.8 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से करीब 10.5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल और डेटा लोकलाइजेशन नीतियों के कारण होगी। इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ एआई से जुड़ा काम ही करीब 6.8 गीगावाट क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा कम समय में डेटा प्रोसेस करने की जरूरत, सख्त डेटा लोकलाइजेशन नियम और बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतें भी इस मांग को बढ़ा…

नई दिल्ली, 2 मई (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में डेटा सेंटर की क्षमता वित्त वर्ष 2031 तक लगभग 6 गुना बढ़कर 1.8 गीगावाट (जीडब्ल्यू) से करीब 10.5 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। यह बढ़ोतरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते इस्तेमाल और डेटा लोकलाइजेशन नीतियों के कारण होगी।

इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में कहा गया है कि सिर्फ एआई से जुड़ा काम ही करीब 6.8 गीगावाट क्षमता का इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा कम समय में डेटा प्रोसेस करने की जरूरत, सख्त डेटा लोकलाइजेशन नियम और बढ़ती कंप्यूटिंग जरूरतें भी इस मांग को बढ़ा रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बदलते वैश्विक हालात और भारत की नीतियां डेटा सेंटर सेक्टर में कई वर्षों तक बड़े निवेश को बढ़ावा दे रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 60 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है। इसमें जमीन, बिजली सिस्टम, कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग उपकरण शामिल हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन ऊर्जा-खपत वाले डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए बिजली क्षेत्र में 20 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश की जरूरत होगी। साथ ही कंपनियां अब नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज सॉल्यूशंस की ओर भी बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा लोकलाइजेशन जैसे नियम, डेटा सेंटर को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा और सरकारी प्रोत्साहन से निवेश तेजी से बढ़ रहा है और वैश्विक कंपनियां भारत की ओर आकर्षित हो रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “रणनीतिक रूप से, देश में डेटा स्टोर करने से डिजिटल संप्रभुता बढ़ती है, विदेशी इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भरता कम होती है और भारत वैश्विक टेक कंपनियों के लिए एक क्षेत्रीय हब बन सकता है।”

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इतनी तेज़ी से विस्तार में कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे सस्ती और भरोसेमंद बिजली की उपलब्धता और हाई-एंड कंप्यूटिंग हार्डवेयर के लिए भारत की आयात पर निर्भरता।

मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, 2030 तक भारत में होने वाले नए निवेश (कैपेक्स) का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा ऊर्जा, डेटा सेंटर और रक्षा क्षेत्रों में जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आने वाले 5 सालों में इन सेक्टर्स में करीब 800 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश हो सकता है और वित्त वर्ष 2030 तक भारत की निवेश दर जीडीपी के 37.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

–आईएएनएस

डीबीपी

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