नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। देश में पेट्रोल और डीजल की खपत में अगस्त में पिछले साल के इसी महीने की तुलना में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह देश में उस महीने के दौरान बढ़ी हुई आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। ये आकलन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के योजना प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार है।
देश में सबसे ज्यादा बिकने वाले पेट्रोलियम उत्पाद, डीजल का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट और खेती के क्षेत्रों में होता है। इसकी खपत पिछले साल के इसी महीने में 6.58 मिलियन टन थी, जो बढ़कर 7.00 मिलियन टन हो गई, यानी इसमें 6.46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
देश के हाईवे नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है और पूरे देश में सामान की आवाजाही बढ़ी है, जिसके कारण डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह देश में ट्रैक्टरों की संख्या बढ़ने से भी ईंधन की खपत बढ़ी है। इस साल अगस्त में कमजोर मानसून के कारण किसानों को सिंचाई के लिए डीजल से चलने वाले पानी के पंपों पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ा, जिससे खपत में बढ़ोतरी हुई है।
अगस्त में पेट्रोल की खपत सालाना आधार पर 7.88 प्रतिशत बढ़कर 3.82 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 3.54 मिलियन टन थी। बढ़ती अर्थव्यवस्था में शहरों, कस्बों और ग्रामीण इलाकों में कारों और दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ने से पेट्रोल की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है।
सरकारी आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत में अगस्त के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई।
अगस्त में एलपीजी की खपत सालाना आधार पर 16.15 प्रतिशत घटकर 2.42 मिलियन टन रह गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 2.89 मिलियन टन थी। पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट आई है, जहां से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है। इस वजह से उस क्षेत्र से एजपीजी के आयात में बाधा आई है।
सामान्य समय में भारत अपनी एलपीजी का 50 प्रतिशत से ज्यादा आयात इसी रास्ते से करता है, लेकिन अब उसे दूर के देशों से ईंधन मंगाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सरकार ने ग्राहकों को खाना पकाने के लिए एलपीजी से पाइप वाली नेचुरल गैस (पीएनजी) पर स्विच करने के लिए प्रोत्साहित किया है और संकट से निपटने के लिए घरेलू पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के मकसद से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए इंसेंटिव भी शुरू किए हैं।
–आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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