सुजल गांव आईडी : ग्रामीण पाइपलाइन से जलापूर्ति योजनाओं की मैपिंग के लिए आईडी लॉन्च

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नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने शुक्रवार को ‘सुजल गांव आईडी’ का शुभारंभ किया। यह एक योजना-आधारित यूनिक डिजिटल पहचान है, जो ग्रामीण पाइप से पानी की सप्लाई की पूरी डिजिटल मैपिंग करने में मदद करती है। एक बयान के मुताबिक, जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन रोडमैप पर चर्चा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग (पीएचईडी) ग्रामीण जल आपूर्ति (आरडब्ल्यूएस) और पंचायती राज विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान मंत्री द्वारा आईडी जारी की गई। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार, प्रत्येक ग्रामीण…

नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने शुक्रवार को ‘सुजल गांव आईडी’ का शुभारंभ किया। यह एक योजना-आधारित यूनिक डिजिटल पहचान है, जो ग्रामीण पाइप से पानी की सप्लाई की पूरी डिजिटल मैपिंग करने में मदद करती है।

एक बयान के मुताबिक, जल जीवन मिशन 2.0 के कार्यान्वयन रोडमैप पर चर्चा करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लोक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभाग (पीएचईडी) ग्रामीण जल आपूर्ति (आरडब्ल्यूएस) और पंचायती राज विभागों के मंत्रियों के साथ बैठक के दौरान मंत्री द्वारा आईडी जारी की गई।

उन्होंने कहा कि देश में पहली बार, प्रत्येक ग्रामीण पेयजल योजना को एक डिजिटल पहचान सौंपी जा रही है, जिससे ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली एक एकीकृत राष्ट्रीय मंच पर आ जाएगी। अब तक 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 1.64 लाख सुजल गांव आईडी बनाई जा चुकी हैं, जो 67,000 सुजलाम भारत आईडी से जुड़ी हुई हैं।

इससे पहले, पाटिल ने राज्यों से योजनाओं को समय पर पूरा करने और जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा कि जल राज्य का विषय है, इसलिए मिशन की सफलता ग्रामीण घरों में विश्वसनीय नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में राज्य सरकारों की जवाबदेही पर निर्भर करती है। जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना भी बैठक में उपस्थित रहे।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कुछ राज्यों में तकनीकी खामियों के कारण देरी हुई है और इस बात पर जोर दिया कि अत्यधिक बड़े या तकनीकी रूप से गैर-अनुरूप कार्यों के परिणामस्वरूप होने वाला कोई भी व्यय संबंधित राज्य सरकारों को वहन करना होगा, यह देखते हुए कि राज्य निधि भी सार्वजनिक धन है और इसलिए इसका उपयोग उच्चतम स्तर की सतर्कता और जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए।

उन्होंने ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अनुमोदित तकनीकी विशिष्टताओं, व्यय सीमाओं और उचित स्रोत मूल्यांकन का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रत्येक सुजलाम भारत आईडी योजना की अवसंरचना आईडी और सेवा क्षेत्र आईडी को एकीकृत करती है, जिससे ग्रामीण जल सेवा वितरण का एक व्यापक डिजिटल फुटप्रिंट तैयार होता है।

इसमें कहा गया है कि यह पहल एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुधार और एक परिवर्तनकारी कदम है, जो पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत करता है और तकनीकी रूप से सशक्त विकसित भारत 2047 की परिकल्पना में योगदान देता है।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम

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