जयपुर, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान में कथित 960 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले से जुड़े मामले में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
दरअसल, एसीबी ने कोर्ट से उनकी पुलिस कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सुनवाई के दौरान सुबोध अग्रवाल ने इसका विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एसीबी की मांग खारिज कर दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान सुबोध अग्रवाल ने जांच एजेंसी के दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एजेंसी यह आरोप लगा रही है कि उन्होंने सवालों का जवाब नहीं दिया, जबकि उन्होंने हर सवाल का जवाब दिया है। उन्होंने पूछा, “बताइए कौन सा सवाल है जिसका मैंने जवाब नहीं दिया?”
एसीबी ने सुबोध अग्रवाल से पूछताछ के लिए करीब 100 सवालों की एक लंबी सूची तैयार की थी और पिछले कुछ दिनों में उनसे गहन पूछताछ की गई।
हालांकि, अग्रवाल ने दावा किया कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। इस बीच, उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर अलग सेल में रखने की मांग की है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सुबोध अग्रवाल ने जांच की दिशा पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके कार्यकाल में वित्त समिति द्वारा जांचे गए 37 मामलों में से केवल चार ही उनके समय के हैं, जबकि बाकी 33 मामले उनके पूर्ववर्ती के समय के हैं जिनकी राशि करीब 600 करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी उन मामलों पर ज्यादा ध्यान दे रही है, जहां कोई पैसा नहीं लिया गया जबकि असली गड़बड़ियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान सुबोध अग्रवाल की तबीयत बिगड़ गई थी। हालांकि बाद में मेडिकल जांच में उनकी हालत स्थिर पाई गई।
वहीं, कोर्ट ने उनकी एक और अर्जी भी खारिज कर दी जिसमें उन्होंने अपनी सास के तेरहवीं कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत मांगी थी।
अभी मामले में जांच जारी है। एसीबी उन वित्तीय फैसलों की पड़ताल कर रही है, जो सुबोध अग्रवाल के कार्यकाल (अप्रैल 2022 से मई 2023) के दौरान जल आपूर्ति विभाग की वित्त समिति के अध्यक्ष रहते हुए लिए गए थे।
–आईएएनएस
पीआईएम/पीएम
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