जम्मू-कश्मीर सरकार ने आयुष की पहुंच और वेलनेस पर्यटन को मजबूत करने पर जोर दिया

श्रीनगर, 2 जून (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार ने मंगलवार को आयुष प्रणाली के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, इसकी पहुंच बढ़ाने और वेलनेस पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने मंगलवार को राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत जम्मू-कश्मीर आयुष सोसायटी की गवर्निंग बॉडी की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य वार्षिक कार्य योजना (एसएएपी) 2026-27 को मंजूरी दी गई, जिसे आगे भारत सरकार के आयुष मंत्रालय को भेजा जाएगा।

बैठक में वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, योजना विभाग के आयुक्त-सचिव, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त-सचिव, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक, आयुष निदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

निवारक और समग्र स्वास्थ्य देखभाल में आयुष प्रणालियों के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने निजी हितधारकों के सहयोग से एक मजबूत कल्याण नीति तैयार करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि वेलनेस टूरिज्म पूरे देश में एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभर रहा है। जम्मू-कश्मीर के विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को देखते हुए यहां इसके लिए अपार संभावनाएं हैं।

केरल, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक प्रमुख वेलनेस और स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने विभाग को निर्देश दिया कि वे पूरे केंद्र शासित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में प्रमुख आयुष जनकल्याण कार्यक्रमों के तहत सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

इनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस और अन्य मस्कुलोस्केलेटल विकारों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम व नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम, आयुष आधारित मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल, आयुष वृद्धावस्था स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूली बच्चों के लिए आयुष के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली, आयुष उपशामक सेवाएं और आयुष मोबाइल चिकित्सा इकाइयां शामिल हैं।

उन्होंने पहुंच और कवरेज को काफी बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि इन कार्यक्रमों का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके।

मजबूत निगरानी तंत्र की जरूरत पर जोर देते हुए दुल्लू ने निदेशक से आग्रह किया कि वे आयुष स्वास्थ्य सुविधाओं और शिक्षण संस्थानों का नियमित दौरा करें, ताकि उनके कामकाज का आकलन किया जा सके और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

उन्होंने विभाग को सरकारी संस्थानों में हर्बल गार्डन स्थापित करने और स्थानीय स्वयं सहायता समूहों को औषधीय जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में शामिल करने के भी निर्देश दिए, ताकि स्वदेशी औषधीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा सके और साथ ही आजीविका के अवसर भी पैदा किए जा सकें।

मुख्य सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि आयुष कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के कामकाज को मजबूत करने के लिए निर्धारित भर्ती एजेंसियों के माध्यम से फैकल्टी की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाई जाए, ताकि शैक्षणिक स्तर में सुधार हो सके।

इस अवसर पर वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार ने विभाग को मौजूदा सुविधाओं को बढ़ाने और मजबूत करने पर ध्यान देने की सलाह दी, ताकि एक ही छत के नीचे आयुष सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध कराई जा सके।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने से, कई छोटी-छोटी और सीमित प्रभाव वाली पहलों में संसाधन बांटने की तुलना में बेहतर परिणाम मिलेंगे।

नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से पैदा होने वाली चुनौती को रेखांकित करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव ने नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास प्रयासों में आयुष उपायों को शामिल करने की भी वकालत की और विभाग से चल रहे ‘नशा मुक्त अभियान’ में सक्रिय रूप से योगदान देने का आग्रह किया।

उन्होंने इस समस्या के प्रभावी समाधान के लिए ‘संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण’ के महत्व पर जोर दिया।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त-सचिव एम. राजू ने बैठक में जम्मू-कश्मीर में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के विस्तार और सुदृढ़ीकरण के लिए तैयार किए गए रोडमैप की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित वार्षिक कार्य योजना जिला-स्तरीय आयुष अधिकारियों और आयुष मेडिकल कॉलेजों के प्रमुखों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई है। इसमें स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन विकास, संस्थागत क्षमता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं प्रदान करने के लिए बड़े निवेश की परिकल्पना की गई है।

बैठक के दौरान आयुष निदेशक डॉ. अजय कुमार टिकू ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने 58.539 करोड़ रुपए के संभावित संसाधन आवंटन का संकेत दिया है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेश ने आयुष सुविधाओं की बढ़ती मांग और पिछले कार्यक्रमों के तहत निधियों के संतोषजनक उपयोग को ध्यान में रखते हुए 91.997 करोड़ रुपए की एक व्यापक कार्ययोजना प्रस्तावित की है।

उन्होंने गवर्निंग बॉडी को आगे बताया कि इस योजना में 523 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को मजबूत करना, सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में आयुष इकाइयों का विस्तार करना, अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में जरूरी दवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, मौजूदा आयुष अस्पतालों और डिस्पेंसरियों को अपग्रेड करना, और उन क्षेत्रों में नई स्वास्थ्य सुविधाओं को तेजी से पूरा करना शामिल है, जहां स्वास्थ्य सेवाएं कम उपलब्ध हैं।

राष्ट्रीय आयुष मिशन के शासन और कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए शासी निकाय ने जम्मू-कश्मीर आयुष सोसायटी की कार्यकारी समिति के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी। इसमें स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, वित्त, योजना और अन्य तकनीकी हितधारकों का प्रतिनिधित्व शामिल किया गया है। बैठक में राष्ट्रीय आयुष मिशन के विभिन्न घटकों के तहत आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत जनशक्ति की नियुक्ति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में राष्ट्रीय आयुष मिशन के विभिन्न घटकों के तहत आयुष मंत्रालय द्वारा स्वीकृत जनशक्ति की नियुक्ति पर भी विचार-विमर्श किया गया।

आयुष प्रणालियों को मजबूत करने के प्रति जम्मू-कश्मीर सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्य सचिव ने बेहतर स्वास्थ्य सेवा बुनियादी ढांचे, व्यापक पहुंच कार्यक्रमों और आयुष उपचारों व वेलनेस पद्धतियों के लाभों के बारे में अधिक जन जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोगों को सुलभ, किफायती और समग्र स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

–आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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