अंबुवाची मेला खत्म होने के बाद कामाख्या मंदिर फिर से खुला, लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद

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नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर को वार्षिक अंबुबाची मेले के समापन के बाद शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा। मंदिर तीन दिनों तक बंद रहा, क्योंकि इस दौरान मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला काल से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का पालन किया गया। मंदिर के कपाट 22 जून की रात 9 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान के साथ बंद किए गए थे। मान्यता है कि इस अवधि में मां कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था में रहती हैं। इसी कारण तीन दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं का…

नई दिल्ली, 26 जून (आईएएनएस)। असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर को वार्षिक अंबुबाची मेले के समापन के बाद शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिया जाएगा। मंदिर तीन दिनों तक बंद रहा, क्योंकि इस दौरान मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला काल से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का पालन किया गया।

मंदिर के कपाट 22 जून की रात 9 बजकर 08 मिनट 42 सेकंड पर ‘प्रवृत्ति’ अनुष्ठान के साथ बंद किए गए थे। मान्यता है कि इस अवधि में मां कामाख्या वार्षिक रजस्वला अवस्था में रहती हैं। इसी कारण तीन दिनों तक मंदिर के गर्भगृह में श्रद्धालुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा और नियमित पूजा-अर्चना भी स्थगित कर दी गई।

शुक्रवार सुबह नित्य पूजा के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद भक्त मां कामाख्या के दर्शन कर सकेंगे और उनका आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

मंदिर प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं, साधु-संतों और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। सुरक्षा, यातायात, ठहरने और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

अंबुबाची मेला शक्ति उपासना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। यह पर्व धरती माता की उर्वरता और सृजन शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान देवी कामाख्या, जो स्त्री शक्ति और सृजन की प्रतीक हैं, अपने वार्षिक रजस्वला काल से गुजरती हैं।

गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है।

मंदिर के पुनः खुलने के बाद श्रद्धालुओं को पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र (अंगबस्त्र) भी वितरित किए जाएंगे, जिन्हें अत्यंत शुभ और पूजनीय माना जाता है।

हर वर्ष अंबुबाची मेले में लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और आध्यात्मिक साधक शामिल होते हैं, जिससे गुवाहाटी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। मंदिर प्रशासन और राज्य सरकार ने मेले के सफल और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए व्यापक तैयारियां की हैं।

–आईएएनएस

एसएके/एएस

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