महाबलीपुरम, 20 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने दक्षिण क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मेकेदातु जलाशय परियोजना को लाभप्रद बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से मुख्य रूप से तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों को बड़े पैमाने पर फायदा पहुंचेगा।
महाबलीपुरम की 31वीं क्षेत्रीय बैठक में अपने संबोधन को समाप्त करते हुए डीके शिवकुमार ने लंबे समय से कावेरी जल बंटवारे को लेकर हो रहे विवाद को खत्म करने की अपील लोगों से की।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू ने उनसे बात की, जब वो बैठक के लिए जा रहे थे। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए जरूरी हो जाता है कि वो आपसी विवाद को यथाशीध्र सुलझाएं।
डीके शिवकुमार ने प्रस्तावित प्रस्ताव को एक अवसर के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस प्रस्ताव को तकरार की जगह क्षेत्रीय सहयोग का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि मेकेदातु परियोजना से जुड़ी पानी की हर एक बूंद तमिलनाडु और पुडुचेरी के किसानों के लिए बड़ी मदद साबित होगी। आप हमारी मदद करें तो फिर हम आपकी भी मदद करेंगे।
उन्होंने कहा कि नदियों को राजनीतिक सीमाओं की पहचान नहीं होती है। साथ ही, उन्होंने दक्षिण भारत के राज्यों से अपील की कि वो जल बंटवारे से संबंधित सभी विवाद को पारस्परिक संवाद, सहयोग, समानता, पारदर्शिता और पारस्परिक सहयोग से इस विवाद का समाधान करें।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक, कृष्णा, अपर भद्रा, मेकेदातु और नदी-जोड़ो परियोजनाओं पर अपना विस्तृत पक्ष परिषद के सामने रखेगा। इसके अलावा, शिवकुमार ने भविष्य में होने वाले किसी भी परिसीमन के संबंध में दक्षिण भारत के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बचाने के लिए बड़ी वकालत की।
उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्यों को राष्ट्रीय नीति के तहत आबादी की बढ़ोतरी को सफलतापूर्वक नियंत्रित करने के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने परिषद से आग्रह किया कि वह लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या को यथावत रखने और यह सुनिश्चित करने वाले प्रस्ताव का समर्थन करे कि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संख्या या अनुपात, किसी भी लिहाज से कम न हो।
उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि महिला आरक्षण को बिना देर किए लागू किया जाना चाहिए। संसद की मौजूदा स्थिति को देखते हुए हमें पूरी तरह से जनसंख्या नियंत्रण या परिसीमन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
शिवकुमार ने कहा कि दक्षिण भारत के पांच राज्य देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 33 फीसदी योगदान देते हैं। दक्षिण भारत के हिस्से में महज पांच राज्य आते हैं।
उनके मुताबिक, अकेले कर्नाटक की बात करें, तो जीडीपी में इसका हिस्सा करीब 9 फीसदी है, जबकि इस राज्य में जनसंख्या महज 5.5 फीसदी ही है।
उन्होंने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत बंटने योग्य टैक्स पूल में कर्नाटक का हिस्सा 4.7 प्रतिशत से घटकर 3.6 प्रतिशत हो गया है, जिससे छह वर्षों में अनुमानित 65,000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि 16वें वित्त आयोग ने 4.131 तक हिस्सा बढ़ा दिया है। इसी को देखते हुए पूरे सहयोग की मांग की।
शिवकुमार ने बेंगलुरु-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, रायचूर में एम्स और कल्याणा कर्नाटक के लिए एक विशेष पैकेज सहित कई बड़े केंद्रीय प्रोजेक्ट्स की भी मांग की।
उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, तटीय कटाव और किसानों के कल्याण, ग्रामीण बैंक, खनिज कराधान अधिकार और ड्रग्स तस्करी कोलेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने इन सभी क्षेत्रों में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकार से सहयोग की मांग की।
–आईएएनएस
एसएचके/वीसी
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