मैसूरु दशहरा में कंबाला को शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं: कुमारस्वामी

Summary :

बेंगलुरु, 11 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के मैसूरु दशहरा समारोह में कंबाला को शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध इस त्योहार के पारंपरिक स्वरूप को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है। कंबाला कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के तटीय क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक भैंस दौड़ उत्सव है। कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा कि मैसूरु दशहरा वर्षों से विकसित होकर अपनी विशिष्ट पहचान और विरासत बना चुका है, और इसके पारंपरिक स्वरूप को बदलने का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।…

बेंगलुरु, 11 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के मैसूरु दशहरा समारोह में कंबाला को शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध इस त्योहार के पारंपरिक स्वरूप को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं है।

कंबाला कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों के तटीय क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक भैंस दौड़ उत्सव है।

कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा कि मैसूरु दशहरा वर्षों से विकसित होकर अपनी विशिष्ट पहचान और विरासत बना चुका है, और इसके पारंपरिक स्वरूप को बदलने का कोई भी प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मैसूरु दशहरा समारोह में कंबला को शामिल करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि यह लंबे समय से अपनी अनूठी परंपराओं और भव्यता के लिए जाना जाता है। दशहरा की स्थापित परंपराओं को भंग करने का कोई प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।

कुमारस्वामी ने कंबाला को तटीय कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि भैंसों की यह पारंपरिक दौड़ इस क्षेत्र के रीति-रिवाजों, मान्यताओं और भूगोल से गहराई से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि कंबाला तटीय क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि और आस्था का प्रतीक है। यह एक ऐसी परंपरा है जो इस क्षेत्र के भूगोल और जीवनशैली से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। इसे मैसूरु में लाना इन दोनों परंपराओं से जुड़ी पवित्रता और दिव्य विरासत को कमजोर करेगा, जो स्वीकार्य नहीं है।

केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि कंबाला का असली सार तटीय कर्नाटक के प्राकृतिक परिवेश में निहित है। तटीय क्षेत्र हरी-भरी हरियाली और प्रचुर जल से समृद्ध है। उस प्राकृतिक परिवेश में कंबला देखना एक अनूठा और सुखद अनुभव है। इस आयोजन को कहीं और स्थानांतरित करके न तो मैसूरु के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की आवश्यकता है और न ही तटीय क्षेत्र के लोगों की।

कर्नाटक सरकार द्वारा 2026 के मैसूरु दशहरा समारोह में कंबाला को एक आकर्षण के रूप में शामिल करने के प्रस्ताव पर चल रही बहस के बीच उनकी ये टिप्पणियां आई हैं। इस कदम का मैसूरु राजपरिवार, विरासत विशेषज्ञों और कई संगठनों ने विरोध किया है।

विश्व प्रसिद्ध मैसूरु दशहरा समारोह के दौरान पारंपरिक तटीय खेल कंबाला के आयोजन के कर्नाटक सरकार के प्रस्ताव ने विवाद को जन्म दिया है, जिससे राज्य सरकार और मैसूरु राजपरिवार के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।

–आईएएनएस

एमएस/

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.