सभ्यता से साझेदारी तक : PM मोदी के नेतृत्व में भारत-इंडोनेशिया संबंधों का नया अध्याय

Summary :

India – Indonesia Relation : भारत और इंडोनेशिया के संबंधों की कहानी केवल दो पड़ोसी समुद्री देशों की कूटनीतिक यात्रा नहीं है। यह उन सभ्यतागत रिश्तों की कहानी है, जिन्होंने दो हजार वर्षों से अधिक समय तक दोनों समाजों को जोड़े रखा और जो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बन चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा इसी परिवर्तन का सबसे सशक्त उदाहरण है। यह यात्रा केवल समझौतों और घोषणाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने स्पष्ट किया कि भारत अपनी प्राचीन सभ्यता को केवल इतिहास का विषय नहीं मानता, बल्कि…

India – Indonesia Relation : भारत और इंडोनेशिया के संबंधों की कहानी केवल दो पड़ोसी समुद्री देशों की कूटनीतिक यात्रा नहीं है। यह उन सभ्यतागत रिश्तों की कहानी है, जिन्होंने दो हजार वर्षों से अधिक समय तक दोनों समाजों को जोड़े रखा और जो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधुनिक रणनीतिक साझेदारी का मजबूत आधार बन चुके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की हालिया इंडोनेशिया यात्रा इसी परिवर्तन का सबसे सशक्त उदाहरण है। यह यात्रा केवल समझौतों और घोषणाओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने स्पष्ट किया कि भारत अपनी प्राचीन सभ्यता को केवल इतिहास का विषय नहीं मानता, बल्कि उसे भविष्य की साझेदारियों का प्रभावी माध्यम बना रहा है।

भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंध उस दौर से हैं, जब आधुनिक राष्ट्र-राज्यों की अवधारणा भी अस्तित्व में नहीं थी। भारतीय व्यापारी, संत और विद्वान समुद्री मार्गों से इंडोनेशिया पहुँचे और अपने साथ केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति, दर्शन और जीवन मूल्यों का भी आदान-प्रदान लेकर गए। आज भी रामायण और महाभारत इंडोनेशिया की सांस्कृतिक चेतना का अभिन्न हिस्सा हैं।

संस्कृत का प्रभाव वहाँ की भाषा में दिखाई देता है, गरुड़ उसका राष्ट्रीय प्रतीक है और बाली भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत छाप को संजोए हुए है। यही साझा विरासत दोनों देशों के संबंधों की सबसे मजबूत नींव रही है।

लंबे समय तक इन संबंधों को केवल सांस्कृतिक निकटता के रूप में देखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विरासत को नई दिशा दी है। उन्होंने साझा अतीत को साझा भविष्य में बदलते हुए सभ्यतागत कूटनीति को भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना दिया है।

सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

इंडोनेशिया द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बिंटांग आदिपूर्णा’ से सम्मानित किया जाना इसी बदलती सोच का प्रमाण है। यह सम्मान केवल किसी व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक संबंधों की वैश्विक स्वीकार्यता है। इसी प्रकार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का अपने “भारतीय डीएनए” का उल्लेख करना और

पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना करना यह दर्शाता है कि भारत का सांस्कृतिक प्रभाव और वैश्विक सम्मान लगातार बढ़ रहा है। पीएम मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दृष्टिकोण का विस्तार योग्याकार्ता स्थित नौवीं शताब्दी के यूनेस्को विश्व धरोहर प्रम्बानन हिंदू मंदिर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में भारत के सहयोग के निर्णय में भी दिखाई देता है।

यह पहल केवल एक प्राचीन मंदिर के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

1965 और आज के भारत-इंडोनेशिया संबंधों की तुलना

इस परिवर्तन को समझने के लिए 1965 और आज के भारत-इंडोनेशिया संबंधों की तुलना पर्याप्त है। वर्ष 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इंडोनेशिया पाकिस्तान के साथ खड़ा था। आज वही इंडोनेशिया भारत के सबसे निकट रणनीतिक साझेदारों में शामिल है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक विश्वसनीयता और सक्रिय कूटनीति ने इस रिश्ते को नई दिशा दी है।

इसका सबसे बड़ा प्रमाण प्रधानमंत्री मोदी की हालिया यात्रा के दौरान हुए वे समझौते हैं, जिन्होंने दोनों देशों के संबंधों को रक्षा, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और आर्थिक सहयोग के नए आयाम दिए। इसी सोच का विस्तार शिक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में भी दिखाई देता है। आईआईएम बेंगलुरु का पहला विदेशी परिसर इंडोनेशिया के सिंघासारी स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन में स्थापित किया जाएगा। इससे दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत के प्रबंधन शिक्षा मॉडल को नई पहचान मिलेगी।

स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्र में भी नई पहल

वहीं भारत का निर्वाचन आयोग और इंडोनेशिया का KPU चुनाव प्रबंधन, मानव संसाधन विकास, चुनावी तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विकास में सहयोग करेंगे। दुनिया के सबसे बड़े और तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच यह साझेदारी लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच बढ़ते विश्वास का भी प्रतीक है।

स्वास्थ्य और जनकल्याण के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने नई पहल की है। शीघ्र ही इंडोनेशिया के लगभग 28 करोड़ नागरिकों के लिए किफायती भारतीय दवाएँ उपलब्ध होंगी। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए फेलोशिप कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। भारत ने अपनी मिड-डे मील योजना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का अनुभव भी इंडोनेशिया के साथ साझा किया है, जिससे गरीबी कम करने और कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में सहयोग मिलेगा।

यह भी पढ़ें : DTC ने जारी किया आदेश, अगस्त से केवल स्मार्ट कार्ड से ही बसों में फ्री सफर कर पाएंगी महिलाएं

Avinay