बेंगलुरु, 12 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि विशेष रूप से दिव्यांग बच्चों के लाभ के लिए अगले वर्ष तक राज्य के सभी जिलों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिला अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) स्थापित किए जाएंगे।
स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने यह घोषणा विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रकाश कोलिवाड द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में की।
मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में दिव्यांगता और स्वास्थ्य समस्याओं की प्रारंभिक जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है। इसके तहत डीईआईसी केंद्र स्थापित किए जाते हैं, जहां विकास संबंधी देरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त बच्चों की शुरुआती पहचान और इलाज किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इन केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञ, स्टाफ नर्स, कार्डियोलॉजिस्ट और नेत्र रोग विशेषज्ञ जैसे विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे, जबकि कुछ केंद्रों में मनोवैज्ञानिक भी तैनात किए जाएंगे, ताकि बच्चों को विशेष सहायता मिल सके।
मंत्री ने बताया कि फिलहाल राज्य में 17 डीईआईसी केंद्र संचालित हो रहे हैं और कोप्पल में जल्द ही एक नया केंद्र शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा, “सरकार ने निर्णय लिया है कि इन केंद्रों को राज्य के सभी जिलों में स्थापित किया जाएगा। कम उम्र में स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और इलाज बच्चों के भविष्य पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव डालता है।”
इस मुद्दे को उठाते हुए विधायक प्रकाश कोलीवाड ने डीईआईसी केंद्रों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि राज्य में दिव्यांग बच्चों की अनुमानित संख्या और पंजीकृत मामलों के बीच बड़ा अंतर है।
उन्होंने कहा कि एक सर्वे के अनुसार राज्य में लगभग 6.3 प्रतिशत बच्चे दिव्यांग हैं, लेकिन उनके रानीबेन्नूर विधानसभा क्षेत्र में केवल 137 बच्चे ही पंजीकृत हैं, जबकि अनुमान के मुताबिक तालुक में करीब 18,000 दिव्यांग बच्चे होने चाहिए।
कोलीवाड ने यह भी बताया कि हावेरी जिले में फिलहाल कोई डीईआईसी केंद्र नहीं है और इसे स्थापित करने का प्रस्ताव भी अभी तक मंजूर नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्रों के अभाव में खासकर गरीब परिवारों के कई बच्चों को चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाती और कई मामलों में उन्हें सड़कों पर संघर्ष करते देखा गया है।
विधायक ने यह भी बताया कि उनकी अपनी बेटी दिव्यांग है और उन्होंने इस क्षेत्र को उपेक्षित बताया। उन्होंने सरकार से हावेरी जिले में जल्द से जल्द डीईआईसी केंद्र की मंजूरी देने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि आरबीएसके कार्यक्रम के तहत हजारों बच्चों की पहचान हो चुकी है, लेकिन इलाज के लिए उन्हें हुब्बल्ली, मंगलुरु और शिवमोग्गा जैसे शहरों तक जाना पड़ता है।
कोलीवाड ने तालुक स्तर पर टेली-थेरेपी और टेली-काउंसलिंग सेवाएं शुरू करने तथा दिव्यांग बच्चों को डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के तहत लाने की भी मांग की। उनका कहना था कि इससे सरकार को उनकी जरूरतों की पहचान करने और उन्हें जरूरी सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जिससे आने वाली पीढ़ियां अधिक स्वस्थ बन सकें।
–आईएएनएस
डीएससी
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