कोच्चि, 24 जुलाई (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को नितिन राज आत्महत्या मामले के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी में हुई लापरवाही को लेकर पुलिस की कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने जांच की निगरानी कर रहे अधिकारी से पूछा कि इतने संवेदनशील मामले की जांच में प्रक्रिया संबंधी ऐसी गलती कैसे हुई?
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कन्नूर डेंटल कॉलेज के प्रोफेसर और इस मामले के मुख्य आरोपी डॉ. एम. कोडंडा राम की गिरफ्तारी में हुई लापरवाही को लेकर डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस सुधीर कल्लन से जवाब मांगा। उन्होंने पूछा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में ऐसी गलती कैसे हुई।
अदालत ने अधिकारी से कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों की जांच में किसी भी तरह की प्रक्रियागत गलती नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसका फायदा आखिरकार आरोपी को मिल सकता है।
अदालत ने पुलिस उपाधीक्षक से पूछा कि जांच की निगरानी में उनकी क्या जिम्मेदारी थी। अदालत ने कहा, “इतने संवेदनशील मामले में जांच या गिरफ्तारी के दौरान किसी भी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए, जिससे आरोपी कानून की पकड़ से बच जाए।”
अदालत ने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह भी पूछा कि क्या यह चूक जानबूझकर की गई थी।
जस्टिस बदरुद्दीन ने पूछा, “क्या यह गृह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश है, जबकि वह ‘ऑपरेशन तूफ़ान’ जैसे कई अच्छे काम कर रहा है? क्या आप सरकार से बदला लेना चाहते हैं?”
पुलिस उपाधीक्षक ने जवाब दिया, “ऐसी कोई बात नहीं है, माननीय न्यायालय।”
अदालत नितिन राज के माता-पिता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा गया था, जिसके अनुसार गिरफ्तारी के समय आरोपी को यह बताना जरूरी है कि उसे किन आधारों पर गिरफ्तार किया जा रहा है।
डॉ. कोडंडा राम को शुरू में नितिन राज की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था। नितिन राज दलित समुदाय के दंत चिकित्सा के छात्र थे। आरोप है कि जाति के आधार पर उत्पीड़न का सामना करने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
हालांकि, निचली अदालत ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी करार दिया, क्योंकि पुलिस कानून के अनुसार आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताने में विफल रही थी।
प्रक्रिया संबंधी कमी दूर करने के बाद प्रोफेसर को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जांच अधिकारी से बार-बार पूछा कि इतनी बड़ी और बुनियादी चूक कैसे हुई।
न्यायाधीश ने पूछा, “पुलिस उपाधीक्षक के रूप में आपने अब तक कितनी गिरफ्तारियां की हैं? दूसरे मामलों में आपने गिरफ्तारी का कारण बताया है। फिर इस मामले में ऐसा क्यों नहीं किया गया?”
अदालत ने अधिकारी को याद दिलाया कि उनका कर्तव्य निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के जांच करना है, किसी एक पक्ष का बचाव करना नहीं।
अदालत ने कहा, “आप इस तरह की लापरवाही से किसी आरोपी को नहीं बचा सकते। अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाइए। आपका कर्तव्य है कि निष्पक्ष जांच के जरिए पीड़ित और आरोपी, दोनों को न्याय मिले।”
हाई कोर्ट ने सरकारी वकील को यह भी याद दिलाया कि वह पहले ही इन खामियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दे चुका है।
अदालत ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद करेगी। तब तक वह जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के नतीजे का इंतजार करेगी।
–आईएएनएस
एसएचके/एएस
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