कहां गए बिहार सरकार के 92,132 करोड़ रुपये? न यूसी जमा, न मिला खर्च का हिसाब; CAG ने खड़े किए सवाल

Summary :

बिहार विधानसभा में पेश कैग की ताजा रिपोर्ट ने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के विभागों ने 92,132 करोड़ रुपये के 62,632 उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) जमा नहीं कराए हैं, जिससे वित्तीय अनिमियतताओं का खतरा बढ़ गया है।

Bihar CAG Report : बिहार विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों ने वर्षों से खर्च किए गए 92,132.75 करोड़ रुपये का कोई हिसाब-किताब नहीं दिया है।

31 मार्च 2025 तक महालेखाकार कार्यालय को कुल 62,632 उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त ही नहीं हुए। सरकारी खजाने से निकाली गई इतनी बड़ी रकम का लेखा-जोखा पेंडिंग होना गंभीर वित्तीय लापरवाही और फर्जीवाड़े की ओर इशारा करता है। कैग ने साफ चेतावनी दी है कि बिना यूसी जमा किए फंड जारी रखने से बजट की हेरफेर और भ्रष्टाचार का खतरा चरम पर पहुंच जाता है।

5 प्रमुख विभागों में फंसा करोड़ों का हिसाब

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंडिंग यूसी के मामले में राज्य के 5 सबसे बड़े विभाग आगे हैं। इनमें स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, शहरी विकास, शिक्षा और पंचायती राज विभाग शामिल हैं। इन विभागों ने विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये तो खर्च कर दिए, लेकिन आधिकारिक तौर पर यह साबित करने वाला दस्तावेज पेश नहीं किया कि पैसा उसी मद में लगा या नहीं। वित्त विभाग को इस बारे में रिपोर्ट भेजी गई थी, मगर जनवरी 2026 से ही सरकार के जवाब का इंतजार है।

बजट का गणित

रिपोर्ट में राज्य के बजट प्रबंधन पर भी तीखे सवाल उठाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान कुल 3,64,518.87 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 78.78 फीसदी यानी 2,87,178.49 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए।

कुल 77,340.38 करोड़ रुपये बच गए, जिसमें से केवल 13.43 फीसदी राशि ही सरकार को सरेंडर की गई। यही नहीं, कुल खर्च का लगभग 40 फीसदी हिस्सा वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में हड़बड़ी में खर्च किया गया।

मनरेगा और जल नल योजना में भी मिलीं खामियां

  • मनरेगा में खाली पद: 2019-24 के दौरान काम की मांग का आकलन करने के लिए कोई बेसलाइन सर्वे ही नहीं हुआ। यही नहीं, मनरेगा में कुल स्वीकृत 13,798 पदों में से 44% (6,086 पद) खाली पड़े हैं।

  • नल-जल योजना में फर्जी भुगतान: पीएचईडी 46,633 ग्रामीण वार्डों के 11.22 लाख घरों तक नल का पानी नहीं पहुंचा सका। जांच में पाया गया कि ठेकेदारों को 2.31 करोड़ रुपये का भुगतान बिना काम कराए ही कर दिया गया।

  • बाढ़ सुरक्षा और शिक्षा विभाग: जमीन अधिग्रहण न होने से अधवारा बेसिन में टुकड़ों में बने तटबंध बेकार साबित हुए और 28.97 करोड़ रुपये डूब गए। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा सर्विस चार्ज का समय पर भुगतान न करने से 8.47 करोड़ रुपये की पेनल्टी भरनी पड़ी।

कैग की सख्त सिफारिशें

हालात को सुधारने के लिए कैग ने राज्य सरकार को समय सीमा तय कर पेंडिंग यूसी निपटाने, दोषी अफसरों पर कार्रवाई करने और पुराना यूसी मिले बिना नया फंड जारी न करने की सख्त सलाह दी है।

हालांकि, तमाम खुलासों के बीच उप-मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि राज्य में विकास कार्यों के लिए ‘फंड की कोई कमी नहीं है’।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।