तिरुवनंतपुरम, 24 मार्च (आईएएनएस)। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर ने मंगलवार को बताया कि भारत निर्वाचन आयोग को आगामी केरल विधानसभा चुनाव के लिए 1,254 उम्मीदवारों से कुल 2,125 नामांकन पत्र प्राप्त हुए हैं। केरल में 9 अप्रैल को 140 नए विधायकों के चुनाव के लिए मतदान होगा।
केलकर ने कहा कि नामांकन की जांच चल रही है, जिसके बाद नाम वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।
उन्होंने कहा, “वैध उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित की जाएगी और अगले दो हफ्तों के भीतर मतपत्रों की छपाई पूरी कर ली जाएगी।”
केलकर ने बताया कि 1.75 लाख मतदान कर्मियों का यादृच्छिकीकरण और प्रशिक्षण किया जा चुका है। पहली बार आयोग ने प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) के साथ ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल शुरू किए हैं, जो प्रत्यक्ष (फिजिकल) सत्रों के पूरक के रूप में काम करेंगे।
विशेष रूप से 85 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगों के लिए डाक द्वारा मतदान पर विशेष ध्यान दिया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सूक्ष्म पर्यवेक्षक टीमों के साथ रहेंगे, और इस प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। डाक द्वारा मतदान की सुविधा के तहत आवश्यक सेवा कर्मियों को भी शामिल किया गया है।
कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल इकाइयों सहित सीएपीएफ की 145 कंपनियों को तैनात किया जा रहा है, जिनमें से 30 कंपनियां पहले से ही क्षेत्र में मौजूद हैं और क्षेत्र पर नियंत्रण और संवेदनशीलता आकलन कर रही हैं। केरल में 30,471 मतदान केंद्र होंगे, जो सभी कड़ी निगरानी में रहेंगे।
केरल में कुल मतदाताओं की संख्या 2.71 करोड़ है, जिसमें 273 ‘थर्ड-जेंडर’ मतदाता शामिल हैं, जबकि सेवा मतदाताओं (सर्विस वोटर्स) की संख्या 53,984 है।
केलकर ने बताया कि आदर्श आचार संहिता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है; इसके लिए निगरानी दल, उड़न दस्ते (फ्लाइंग स्क्वॉड) और जांच चौकियां (चेक-पोस्ट) सक्रिय रूप से नियमों के उल्लंघन पर नजर रख रही हैं।
एक आधिकारिक पत्र पर भाजपा की केरल इकाई की मुहर (सील) लगे होने से जुड़े विवाद पर टिप्पणी करते हुए केलकर ने इसे एक ‘गंभीर चूक’ करार दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक राजनीतिक दल के प्रतिनिधि द्वारा गलती से प्रसारित किए गए एक दस्तावेज में पार्टी की मुहर लगी हुई थी।
उन्होंने कहा, “त्रुटि का तुरंत पता लगा लिया गया, संदेश वापस ले लिया गया और संशोधित संस्करण जारी किया गया। जांच लंबित रहने तक निलंबन सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।”
उन्होंने जनता से गलत सूचनाओं से बचने और आधिकारिक स्पष्टीकरणों पर भरोसा करने का आग्रह किया।
–आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी
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