केरल चुनाव: एलडीएफ की उम्मीदवारों की लिस्ट लगभग तैयार, यूडीएफ में सीटों पर बातचीत अभी जारी

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तिरुवनंतपुरम, 15 मार्च (आईएएनएस)। चुनाव आयोग ने रविवार को केरल चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है। केरल में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। राज्य में तीन प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की तैयारियों में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है। सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में उम्मीदवारों और सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने में काफी आगे नजर आ रहा है। 10 दलों वाले एलडीएफ में सीपीआई (एम) और सीपीआई ने आंतरिक बैठकों के बाद लगभग अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं और लिस्ट पर सहमति भी बन चुकी है। पार्टी सूत्रों के…

तिरुवनंतपुरम, 15 मार्च (आईएएनएस)। चुनाव आयोग ने रविवार को केरल चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है। केरल में 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। राज्य में तीन प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों की तैयारियों में बड़ा अंतर साफ दिखाई दे रहा है।

सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में उम्मीदवारों और सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने में काफी आगे नजर आ रहा है। 10 दलों वाले एलडीएफ में सीपीआई (एम) और सीपीआई ने आंतरिक बैठकों के बाद लगभग अपने उम्मीदवार तय कर लिए हैं और लिस्ट पर सहमति भी बन चुकी है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक छोटे सहयोगी दलों के साथ भी बातचीत अंतिम चरण में है, इसलिए जल्द ही उम्मीदवारों की लगभग अंतिम सूची जारी की जा सकती है।

एलडीएफ इस चुनाव में मजबूत स्थिति के साथ उतर रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय विधानसभा में एलडीएफ को 99 सीटें मिली थीं, जबकि विपक्षी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को 41 सीटें मिली थीं।

वहीं भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) 2016 में जीती अपनी एकमात्र सीट भी बरकरार नहीं रख सका था।

पिछले चुनाव के वोट प्रतिशत भी एलडीएफ की बढ़त दिखाते हैं। एलडीएफ को 45.43 प्रतिशत, यूडीएफ को 39.47 प्रतिशत और भाजपा-एनडीए को 12.41 प्रतिशत वोट मिले थे।

दूसरी ओर, आठ दलों वाले यूडीएफ में अभी कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। गठबंधन का नेतृत्व कर रही कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की सूची तय नहीं की है।

इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग और केरल कांग्रेस (जोसेफ) जैसे सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे पर भी बातचीत जारी है।

आमतौर पर कांग्रेस करीब 90 सीटों पर चुनाव लड़ती है और बाकी सीटें सहयोगी दलों में बांटी जाती हैं। इन सहयोगियों में आईयूएमएल, पीजे जोसेफ और अनुप जैकब के नेतृत्व वाली केरल कांग्रेस की इकाइयां, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट मार्क्सिस्ट पार्टी, रिवोल्यूशनरी मार्क्सिस्ट पार्टी और विधायक मणि सी. कप्पेन की पार्टी शामिल हैं।

इतिहास बताता है कि यूडीएफ में सीट बंटवारा हमेशा सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है और इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं दिख रही है।

वहीं भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को सीट बंटवारे में ज्यादा परेशानी होने की संभावना नहीं है। गठबंधन में प्रमुख होने के कारण अधिकांश सीटों पर फैसला भाजपा ही करेगी। इसके साथ भारत धर्म जन सेना (बीडीजेएस) और उद्योगपति से नेता बने साबू एम. जैकब की पार्टी ट्वेंटी20 जैसे सहयोगी भी हैं, जिनका एर्नाकुलम जिले की कुछ सीटों पर प्रभाव है।

अब जब चुनावी मुकाबला औपचारिक रूप से शुरू होने वाला है, तो यह देखना अहम होगा कि कौन सा गठबंधन अपने अंदरूनी मसलों को कितनी जल्दी सुलझाता है, क्योंकि इससे चुनाव प्रचार की शुरुआती गति तय हो सकती है।

–आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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