कोलकाता होटल अग्निकांड: लाइसेंस जारी करने की मौजूदा व्यवस्था में खामियों की समीक्षा कर रही बंगाल सरकार

Summary :

कोलकाता, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पिछले सप्ताह बीरभूम जिले के तारापीठ में और मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर लगी आग में कुल 18 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों की समीक्षा और उन्हें ठीक करने का काम शुरू कर दिया है। स्टेट फायर सर्विस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय “फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट” और “फायर लाइसेंस” देने की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का नीतिगत फैसला लिया गया था। अधिकारी ने बताया, “लाइसेंस देने की प्रक्रिया…

कोलकाता, 23 अगस्त (आईएएनएस)। पिछले सप्ताह बीरभूम जिले के तारापीठ में और मिर्जा गालिब स्ट्रीट पर लगी आग में कुल 18 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस को लाइसेंस देने की प्रक्रिया में मौजूद कमियों की समीक्षा और उन्हें ठीक करने का काम शुरू कर दिया है।

स्टेट फायर सर्विस डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के समय “फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट” और “फायर लाइसेंस” देने की व्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने का नीतिगत फैसला लिया गया था।

अधिकारी ने बताया, “लाइसेंस देने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए पिछली सरकार ने दो अहम नीतिगत फैसले लागू किए थे। पहला, ऐसे होटलों, लॉज और गेस्ट हाउस के मालिकों से ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ (स्व-घोषणा) लेने की व्यवस्था शुरू की गई थी। दूसरा, अलग-अलग फायर सर्विस स्टेशनों के स्टेशन अधिकारियों को यह अधिकार दिया गया कि वे सेल्फ-डिक्लेरेशन जमा करने वाले ऐसे हॉस्पिटैलिटी प्रतिष्ठानों के मालिकों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस जारी कर सकें।”

उन्होंने बताया कि जब ये दो सबसे जरूरी सर्टिफिकेट मिल गए, तो संबंधित सिविक बॉडीज से ट्रेड लाइसेंस लेना और उसके बाद बिजली वितरण कंपनियों से बिजली कनेक्शन लेना काफी आसान हो गया।

अधिकारी ने कहा, “स्टेशन अधिकारियों से मिले फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस की वजह से ऐसे हॉस्पिटैलिटी बिजनेस के मालिक आसानी से ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन हासिल कर पाए, जबकि सिविक बॉडीज या बिजली कंपनियों की तरफ से शायद ही कोई क्रॉस-चेक किया गया हो।”

अब, तारापीठ और कोलकाता में लगी आग के बाद, अलग-अलग लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में ये कमियां साफ तौर पर दिख रही हैं, इसलिए नई राज्य सरकार कुछ पॉलिसी में बदलाव करने की योजना बना रही है।

राज्य फायर सर्विस अधिकारी के अनुसार, प्रस्तावित पॉलिसी बदलावों का मुख्य मकसद लाइसेंस देने की पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर जांच की व्यवस्था करना है।

विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “पहली पॉलिसी जिस पर विचार किया जा रहा है, वह है स्टेशन अधिकारियों के पास मौजूद उस पूर्ण अधिकार को खत्म करना, जिसके तहत वे फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस देते हैं। इसके बजाय, ये दोनों सर्टिफिकेट दो-चरणों वाली जांच के बाद दिए जाने चाहिए। पहले स्टेशन अधिकारियों के स्तर पर और फिर उनसे एक या दो स्तर ऊपर के अधिकारियों द्वारा जांच किया जाना जाहिए।”

अधिकारी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के बीच का अंतर भी समझाया। फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर एनओसी) एक ऐसा दस्तावेज है, जो यह पुष्टि करता है कि कोई इमारत या ढांचा स्थानीय फायर सेफ्टी कोड और आर्किटेक्चर नियमों को पूरा करता है। वहीं, फायर लाइसेंस खास कमर्शियल गतिविधियों या औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए जारी किया गया एक औपचारिक ऑपरेशनल परमिट होता है।

विभाग के अधिकारी ने बताया कि एक प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। इसके तहत, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट और फायर लाइसेंस के आधार पर संबंधित सिविक निकायों द्वारा ट्रेड लाइसेंस और बिजली वितरण कंपनियों द्वारा बिजली कनेक्शन देने की उस व्यवस्था को खत्म किया जाएगा, जिसमें ये लगभग अपने-आप (ऑटोमैटिक रूप से) मिल जाते हैं।

प्रस्ताव यह है कि संबंधित सिविक अधिकारियों और बिजली वितरण कंपनियों को ट्रेड लाइसेंस और बिजली कनेक्शन देने से पहले अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। इससे ऐसी हॉस्पिटैलिटी इकाइयों द्वारा सुरक्षा पहलुओं को नजरअंदाज करके अपनी दुकानें चलाने की संभावना कम हो जाएगी।

–आईएएनएस

ओपी/पीएम

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

IANS Agency

The Indo-Asian News Service (IANS) is a private news agency providing round-the-clock, in-depth coverage of politics, business, entertainment, and world affairs from India and South Asia.