नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चैत्र नवरात्रि के 5वें दिन देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह दिन देवी स्कंदमाता को समर्पित है। उन्होंने देवी स्कंदमाता की दिव्य कृपा को रेखांकित करते हुए एक ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर किया और सभी के कल्याण के लिए उनके दिव्य आशीर्वाद की कामना की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “देवी स्कन्दमाता की करबद्ध प्रार्थना। मेरी कामना है कि अपने ममतामयी स्नेह और आशीर्वाद से वे सबका जीवन आलोकित करें।” उन्होंने ‘संस्कृत सुभाषितम्’ शेयर करते हुए लिखा, “सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदाऽस्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।”
‘संस्कृत सुभाषितम्’ में कहा गया है, “सिंह पर सदैव विराजमान रहने वाली और दोनों हाथों में कमल-पुष्प धारण करने वाली तेजस्वी देवी स्कंदमाता हमें सदा शुभ फल प्रदान करें।”
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मां अम्बे का एक भजन भी शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मां अम्बे की आराधना से भक्ति का अद्भुत आनंद प्राप्त होता है। इससे मन को असीम शांति और आत्मिक शक्ति मिलती है।”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस शुभ अवसर पर देश को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, “मां दुर्गा के पंचम स्वरूप, मां स्कन्दमाता के ‘वात्सल्य’ की छाया चराचर जगत पर सदा बनी रहे। चहुंओर समृद्धि, सुख-शांति व सौभाग्य का वास हो, यही प्रार्थना है।”
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पोस्ट किया, “समस्त प्रदेशवासियों को ज्ञान, मोक्ष और वात्सल्य की अधिष्ठात्री देवी माँ स्कंदमाता की आराधना को समर्पित पावन चैत्र नवरात्रि के पंचम दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे, मेरी यही कामना है।”
नवरात्रि के पंचम दिवस पर वात्सल्य और ममता की प्रतिमूर्ति मां स्कंदमाता को नमन करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजित मां का यह सौम्य स्वरूप मोक्ष के द्वार खोलता है और भक्तों को परम शांति प्रदान करता है। माँ की करुणा हमें संवेदनशीलता के साथ समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती है। मां स्कंदमाता की कृपा से हमारे प्रदेश में प्रेम, सद्भाव और ज्ञान का प्रकाश सदैव फैलता रहे।”
–आईएएनएस
डीसीएच/
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