नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने गुरुवार को भारत में चुनाव प्रक्रिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर यकीन नहीं है कि देश में चुनाव निषपक्ष और पारदर्शी तरीके से होते हैं।
पित्रोदा ने आईएएनएस से कहा, “पूरी प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ है। चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) हो, वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी), इलेक्ट्रॉनिक टैंपरिंग, सॉफ्टवेयर में बदलाव, वोटर लिस्ट, वीडियो रिकॉर्डिंग हो, जब आप पूरी प्रक्रिया को एक साथ देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि कई अलग-अलग पॉइंट हैं, जहां आप हेरफेर कर सकते हैं।”
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि इसमें से कुछ हो रहा है। कितना, कहां, यह बताना मुश्किल है, क्योंकि एक जगह पर एक चीज नहीं हो सकती है, लेकिन कहीं और कुछ और हो सकता है। मुझे यकीन नहीं है कि भारत में चुनाव स्वतंत्र और पारदर्शी है। मेरा भरोसा उठ गया है।”
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर देश के रुख के बारे में, उन्होंने आईएएनएस से कहा कि भारत ने नैतिक रूप से ऊंचा स्थान नहीं लिया है। उन्होंने आगे कहा, “हमने सच में अमीर और ताकतवर हमलावरों के साथ हाथ मिला लिया है।”
सैम पित्रोदा ने ओबीसी कैटेगरी के तहत मुस्लिम रिजर्वेशन पर समर्थन के बारे में भी बात की।
उन्होंने कहा, “मुसलमानों को भी आरक्षण मिलना चाहिए। ठीक है, लेकिन मैं आपको बता सकता हूं कि पिरामिड के सबसे निचले हिस्से में हर किसी को मदद की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “मैं एक ओबीसी का बेटा हूं। मुझे यह नहीं पता था। मेरी पीढ़ी में, किसी को इसकी चिंता नहीं थी। मुझे यह तब तक पता नहीं चला, जब तक, आप जानते हैं, मैंने यहां से ग्रेजुएशन नहीं किया और काम नहीं किया और किसी ने कहा, ‘ओह, आप ओबीसी हैं।’ मैंने कहा, ‘ओह, हां।'”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि जब आप ओबीसी और मुसलमानों को मिलने वाले फायदों की बात करते हैं, तो सारी शिक्षा और स्वास्थ्य लगभग मुफ्त होनी चाहिए।”
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के इस्तेमाल के बारे में बात करते हुए पित्रोदा ने कहा, “मैं एआई का इस्तेमाल भूख मिटाने और गरीबी कम करने के लिए करना चाहता हूं।”
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि एआई का इस्तेमाल सरकार के कामकाज को तेज करने के लिए किया जाना चाहिए। आप इस तरह बात नहीं कर सकते क्योंकि हर कोई आपसे नाराज हो जाएगा।
पित्रोदा के मुताबिक, आज राहुल गांधी का स्टैंड वैसा ही होगा, जैसा पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का होता। अगर नेहरू जी और दूसरे लोग, जो नॉन-अलाइंड मूवमेंट का हिस्सा थे, आज जिंदा होते, तो वे क्या स्टैंड लेते? तो मुझे लगता है कि राहुल गांधी यही स्टैंड लेते। वह पार्टी लाइन से ऊपर, पॉलिटिक्स से ऊपर उठते, वह लोगों, अहिंसा और शांति के लिए बोलते।”
–आईएएनएस
केके/एबीएम
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