ओडिशा सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए लू संबंधी दिशानिर्देश जारी किए

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भुवनेश्वर, 23 मार्च (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार ने सोमवार को राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए श्रमिकों में लू लगने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए कई सलाह जारी कीं, क्योंकि ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत दिन के समय तापमान में तीव्र वृद्धि के साथ हुई है। अप्रैल और उसके बाद के महीनों में भीषण गर्मी की आशंका को देखते हुए, श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा विभाग ने श्रमिकों, विशेष रूप से बाहरी गतिविधियों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कई निवारक उपाय शुरू किए हैं। दिशानिर्देशों के अनुसार, ये उपाय 1 अप्रैल से 15 जून तक लागू…

भुवनेश्वर, 23 मार्च (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार ने सोमवार को राज्य में बढ़ते तापमान को देखते हुए श्रमिकों में लू लगने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए कई सलाह जारी कीं, क्योंकि ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत दिन के समय तापमान में तीव्र वृद्धि के साथ हुई है।

अप्रैल और उसके बाद के महीनों में भीषण गर्मी की आशंका को देखते हुए, श्रम एवं कर्मचारी राज्य बीमा विभाग ने श्रमिकों, विशेष रूप से बाहरी गतिविधियों में लगे श्रमिकों की सुरक्षा के लिए कई निवारक उपाय शुरू किए हैं।

दिशानिर्देशों के अनुसार, ये उपाय 1 अप्रैल से 15 जून तक लागू रहेंगे। इस अवधि के दौरान, नियोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच श्रमिकों से किसी भी प्रकार का श्रम न करवाएं।

यह सलाह राज्य सरकार के सभी विभागों, ओडिशा में कार्यरत केंद्र सरकार के कार्यालयों, निजी नियोक्ताओं, औद्योगिक इकाइयों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, दुकान मालिकों और ठेकेदारों को जारी की गई है।

अधिकारियों ने कार्य समय सारणी में समायोजन की आवश्यकता पर बल दिया है ताकि श्रमिकों को दिन के सबसे गर्म घंटों के दौरान अत्यधिक गर्मी का सामना न करना पड़े।

आवश्यक सेवाओं के कारण यदि कार्य अपरिहार्य हो, तो नियोक्ताओं को स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए पर्याप्त एहतियाती उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।

इन उपायों में कार्यस्थलों पर सुरक्षित और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना, छायादार विश्राम क्षेत्र उपलब्ध कराना, बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करना और श्रमिकों को ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) के पैकेट वितरित करना शामिल है।

इस कदम का उद्देश्य लू लगने से होने वाली थकावट और लू लगने की घटनाओं को कम करना है, जो समय पर इलाज न किए जाने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं। इसके अलावा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और कर्मचारी राज्य बीमा अस्पतालों के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारियों (सीडीएमओ), उप-मंडल चिकित्सा अधिकारियों (एसडीएमओ) और चिकित्सा कर्मियों को लू से संबंधित बीमारियों से निपटने और प्रभावित व्यक्तियों को समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सतर्क और तैयार रहने को कहा गया है।

सरकार का यह सक्रिय दृष्टिकोण चरम मौसम की स्थितियों के कमजोर आबादी, विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूरों और बाहरी कामगारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।

–आईएएनएस

एमएस/

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