‘सरकार को आत्म-मंथन करने की जरूरत’, कांग्रेस नेताओं ने की नीट पर व्यापक चर्चा की मांग

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नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। मानसून सत्र के बीच कांग्रेस संसद में नीट पेपर लीक पर चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई है। बुधवार को कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार को ही आत्म-मंथन करने की जरूरत है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए सुखदेव भगत ने कहा, “एक कहावत है कि ‘जब संसद खामोश हो जाती है या जब सत्ता में खामोश हो जाती है, तो सड़कें बोलने लगती हैं।’ यह एक गंभीर मामला है। जब लगभग…

नई दिल्ली, 22 जुलाई (आईएएनएस)। मानसून सत्र के बीच कांग्रेस संसद में नीट पेपर लीक पर चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गई है। बुधवार को कांग्रेस सांसदों ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सरकार को ही आत्म-मंथन करने की जरूरत है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए सुखदेव भगत ने कहा, “एक कहावत है कि ‘जब संसद खामोश हो जाती है या जब सत्ता में खामोश हो जाती है, तो सड़कें बोलने लगती हैं।’ यह एक गंभीर मामला है। जब लगभग 7.5 करोड़ लोगों का भविष्य दांव पर हो और अनिश्चित लग रहा हो, तो हमने लगातार ये चिंताएं उठाई हैं।”

कांग्रेस सांसद ने कहा कि राहुल गांधी ने बार-बार पेपर लीक के मुद्दों पर चर्चा की मांग की है और लगातार सुधारों की वकालत की है। उन्होंने कहा, “जब कोई और रास्ता नहीं बचता है और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रधानमंत्री आवास के पास विरोध प्रदर्शन करने का फैसला करते हैं, तो इसे टकराव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस पर सरकार को ही आत्म-मंथन करने की जरूरत है।”

राहुल गांधी पर बयान बदलने के आरोपों को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने कहा, “राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और नीट मामले पर संसद में चर्चा की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम के जिम्मेदार प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और शिक्षामंत्री हैं। प्रधानमंत्री सदन के नेता हैं और उनके संरक्षण के बिना कुछ नहीं हो सकता है। जिस तरह बर्बरतापूर्ण कार्रवाई हुई, उसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं और नीट पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान जिम्मेदार हैं। इसलिए हमने व्यापक चर्चा की मांग उठाई।”

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का बचाव करते हुए कहा कि ये प्रदर्शन रोजगार और परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर वास्तविक चिंताओं से प्रेरित थे, न कि राजनीतिक कारणों से।

उन्होंने आईएएनएस से ​​कहा, “90 प्रतिशत छात्र अपने भविष्य के लिए आए हैं, वे राजनीतिक लोग नहीं हैं। वे सही मकसद के लिए आए हैं। 20 जुलाई को मार्च सभी ने मिलकर निकाला था। मैंने लगभग 50 युवाओं से बात की। सभी अपनी मर्जी से आए थे। उन्हें कोई लाया नहीं था। पेपर लीक हो गया है और उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। वे अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की कोशिश के दौरान छात्रों और कांग्रेस से जुड़े संगठनों को पाबंदियों का सामना करना पड़ा है। उदित राज ने कहा, “वे लंबे समय से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कोटा और देहरादून में हजारों युवाओं से बातचीत की। एनएसयूआई सदस्यों को लाठीचार्ज का सामना करना पड़ रहा है। जब हम जंतर-मंतर पर विरोध या प्रदर्शन करने की अनुमति मांगते हैं, तो उसे नामंजूर कर दिया जाता है।”

–आईएएनएस

डीसीएच/

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