नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कथित रूप से हिंसा भड़काने वाले सार्वजनिक बयानों से जुड़े मामले में जांच अधिकारी (आईओ) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने मोइत्रा की इस मांग के आधार पर सवाल उठाते हुए संकेत दिया कि उन्हें जांच में व्यक्तिगत रूप से सहयोग करना होगा।
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि उनकी मुवक्किल को जांच में शामिल होने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना चाहती हैं। इस पर न्यायमूर्ति दत्ता ने पूछा, “वर्चुअली क्यों? सिर्फ इसलिए कि आप सांसद हैं?”
इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि मोइत्रा पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से पेश होती हैं तो उन्हें भीड़ के हमले की आशंका है। उन्होंने एक पुराने घटनाक्रम का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर उन पर अंडे फेंके गए थे। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नहीं हुआ। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “आप सांसद हैं? राजनीति में आने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं। इस तरह की अर्जियां इस अदालत के सामने नहीं आनी चाहिए।”
सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों के बाद मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद शीर्ष अदालत ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया।
महुआ मोइत्रा ने जांच अधिकारी के समक्ष पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने की अनुमति मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
इससे पहले ने महुआ मोइत्रा को कथित रूप से हिंसा भड़काने वाले सार्वजनिक बयानों से जुड़े मामले में अंतरिम राहत देते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी सहित किसी भी तरह की कठोर पुलिस कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने यह अंतरिम संरक्षण 5 अक्टूबर तक दिया था। अदालत ने इसे इस शर्त के साथ मंजूरी दी थी कि मोइत्रा जांच में पूरा सहयोग करेंगी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि पुलिस जांच जारी रख सकती है, लेकिन यदि मोइत्रा जांच में सहयोग करती हैं तो अंतरिम संरक्षण की अवधि के दौरान उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि महुआ मोइत्रा को पूछताछ के लिए चार बार नोटिस भेजा गया, लेकिन उन्होंने संसदीय व्यस्तताओं का हवाला देते हुए पेशी नहीं दी।
वहीं, मोइत्रा की ओर से दलील दी गई थी कि पुलिस स्टेशन में किसी अप्रिय स्थिति की आशंका को देखते हुए उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूछताछ में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया था कि जब भी मोइत्रा पूछताछ के लिए आएं, ऐसी कोई स्थिति उत्पन्न न होने दी जाए।
–आईएएनएस
डीएससी
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