केरल सरकार बिजली संकट से निपटने के लिए फ्लोटिंग सोलर और स्टोरेज विकल्पों पर करेगी विचार

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तिरुवनंतपुरम, 18 सितंबर (आईएएनएस)। बढ़ते तापमान, जलाशयों में पानी का कम स्तर और बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण केरल गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। इस बीच, बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की लंबे समय की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं पर गंभीरता से विचार करेगी। जोसेफ ने यह घोषणा तीन दिवसीय ‘रीइमेजिनिंग केरलम’ कार्यक्रम के अंतिम दिन अक्षय ऊर्जा पर आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए की। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब केरल…

तिरुवनंतपुरम, 18 सितंबर (आईएएनएस)। बढ़ते तापमान, जलाशयों में पानी का कम स्तर और बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर के कारण केरल गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहा है। इस बीच, बिजली मंत्री सनी जोसेफ ने शुक्रवार को कहा कि राज्य की लंबे समय की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं और पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं पर गंभीरता से विचार करेगी।

जोसेफ ने यह घोषणा तीन दिवसीय ‘रीइमेजिनिंग केरलम’ कार्यक्रम के अंतिम दिन अक्षय ऊर्जा पर आयोजित एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए की।

यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब केरल में पिछले कुछ दिनों से बिजली आपूर्ति पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं। एक तरफ बिजली की अधिकतम मांग तेजी से बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ उपलब्धता में भारी कमी आई है।

इस महीने की शुरुआत में बिजली की अधिकतम मांग 5,200 मेगावाट को पार कर गई, जबकि उपलब्धता करीब 4,200 मेगावाट थी। इसके चलते केरल राज्य बिजली बोर्ड को पीक-टाइम में बिजली आपूर्ति पर पाबंदियां लगानी पड़ीं।

मौजूदा संकट ने यह भी दिखाया है कि केरल बिजली के लिए जलविद्युत उत्पादन और दूसरे राज्यों से खरीदी जाने वाली बिजली पर काफी निर्भर है। कम बारिश और जलाशयों में पानी का स्तर घटने से जलविद्युत उत्पादन कम हुआ है। वहीं, अधिक तापमान के कारण बिजली खपत बढ़ गई है। आपूर्ति संबंधी व्यापक समस्याओं के कारण दूसरे राज्यों से मिलने वाली बिजली की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है।

बिजली कटौती को लेकर लोगों में काफी नाराजगी देखी गई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि एलडीएफ शासन के पिछले दशक के दौरान नियमित बिजली कटौती काफी कम हो गई थी। ऐसे में सतीशन सरकार पर तुरंत समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया है। साथ ही सरकार बिजली उत्पादन और आपूर्ति क्षमता बढ़ाने के लिए लंबे समय की योजनाओं पर भी काम कर रही है।

जोसेफ ने कहा कि केरल की भौगोलिक परिस्थितियों और बदलते मौसम के कारण राज्य में बड़े स्तर पर पारंपरिक सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं लगाना मुश्किल है। इसलिए सरकार फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स, पंप्ड-स्टोरेज सुविधाओं और स्थानीय निकायों की भागीदारी से सामुदायिक स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की संभावनाओं पर विचार करेगी।

वायनाड के बाणासुर सागर जलाशय में कंक्रीट आधारित फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की शुरुआत करने वाले एम.आर. नारायणन ने कहा कि राज्य में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के जरिए 2,000 मेगावाट तक बिजली पैदा करने की क्षमता है। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था बनाने की मांग की।

केएसईबी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक एमजी राजमणिकम ने कहा कि ऊर्जा बचत को सरकारी नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे मौजूदा संकट से निपटने का सबसे व्यावहारिक और तत्काल उपाय बताया।

उन्होंने कहा कि घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने वालों की बढ़ती संख्या से बिजली खपत का तरीका बदल रहा है। उन्होंने ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत बताई, जिससे उपभोक्ताओं को उनकी बिजली खपत के बारे में जानकारी और अलर्ट मिले तथा बिजली बचाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

गोलमेज बैठक में सोलर फोटोवोल्टिक, पवन ऊर्जा, छोटे जलविद्युत संयंत्रों, बायोमास और कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाओं को एक साझा ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली से जोड़ने पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा बिजली वितरण कंपनियों, समुदायों, संस्थानों और घरों के स्तर पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

हालांकि, सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती केरल के घरों और कारोबारों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है, जहां बढ़ते तापमान के कारण बिजली की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

–आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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IANS Agency

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