ईसीओआर के राजस्व और सेवाओं पर कोई असर नहीं; सेक्शन ट्रांसफर विवाद पर रेलवे

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भुवनेश्वर, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पलासा-इच्छापुरम सेक्शन को नए बने साउथ कोस्ट रेलवे (एससीओआर) ज़ोन में मिलाने को लेकर बढ़ते विरोध के बीच, भारतीय रेलवे ने रविवार को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि इस कदम से ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इस रूट पर ट्रेनों की सेवाओं में कोई रुकावट आएगी। एक आधिकारिक बयान में, साउथ कोस्ट रेलवे ने कहा कि पलासा-इच्छापुरम सेक्शन, जो लगभग 50 किमी. लंबा है, इसमें सात स्टेशन, पलासा, सुम्मादेवी, मंदसा रोड, बरुवा, सोमपेटा, झाड़ूपुडी और इच्छापुरम शामिल हैं। ये सभी स्टेशन आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम…

भुवनेश्वर, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। पलासा-इच्छापुरम सेक्शन को नए बने साउथ कोस्ट रेलवे (एससीओआर) ज़ोन में मिलाने को लेकर बढ़ते विरोध के बीच, भारतीय रेलवे ने रविवार को एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि इस कदम से ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीओआर) की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा और न ही इस रूट पर ट्रेनों की सेवाओं में कोई रुकावट आएगी।

एक आधिकारिक बयान में, साउथ कोस्ट रेलवे ने कहा कि पलासा-इच्छापुरम सेक्शन, जो लगभग 50 किमी. लंबा है, इसमें सात स्टेशन, पलासा, सुम्मादेवी, मंदसा रोड, बरुवा, सोमपेटा, झाड़ूपुडी और इच्छापुरम शामिल हैं। ये सभी स्टेशन आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित हैं और इनमें से कोई भी ओडिशा की सीमा में नहीं आता।

बयान में कहा गया, “ये स्टेशन छोटे से मध्यम आकार के हैं और मुख्य रूप से यात्री यातायात संभालते हैं। इनमें से कोई भी माल ढुलाई का बड़ा केंद्र नहीं है। इसलिए ईसीओआर के राजस्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”

ट्रेन सेवाओं में संभावित रुकावट की चिंताओं को खारिज करते हुए, एससीओआर ने स्पष्ट किया कि गुजरने वाला माल यातायात, यानी वे ट्रेनें जो इन स्टेशनों से होकर गुजरती हैं, बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी, चाहे वे किसी भी जोन के अधिकार क्षेत्र में आती हों। इसने यह भी बताया कि रेलवे का संचालन जोन की सीमाओं के पार भी बिना किसी रुकावट के चलता रहता है।

एससीओआर ने जोर देकर कहा कि सभी मौजूदा ट्रेनें, जिनमें पलासा-भुवनेश्वर, पलासा-कटक और इच्छापुरम-कटक मेमू/यात्री सेवाएं शामिल हैं, अपने समय, रास्ते या फेरों में बिना किसी बदलाव के चलती रहेंगी। रेलवे ने आगे कहा कि यह विलय एक तकनीकी समायोजन है, जिसका मकसद विशाखापत्तनम डिवीजन में यात्री सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना है।

स्थानांतरण की प्रक्रियाएं, जिनमें कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है, ईसीओआर और एससीओआर के बीच अंतिम रूप दी जा रही हैं। सभी रेल कर्मचारियों के हितों और सेवा शर्तों को तय नियमों के अनुसार पूरी तरह से सुरक्षित रखा जाएगा।

बयान में कहा गया, “ओडिशा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटल है। ओडिशा में रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर रिकॉर्ड पूंजीगत खर्च, स्टेशनों का आधुनिकीकरण, वंदे भारत सेवाएं और ईसीओआर के तहत हाल ही में बनाया गया रायगड़ा डिवीजन इस प्रतिबद्धता के प्रमाण हैं।”

यह ध्यान रखना जरूरी है कि बीजू जनता दल (बीजद), कांग्रेस और सीपीआई(एम) सहित विपक्षी दलों ने इस विलय पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इसे भाजपा के नेतृत्व वाली ‘डबल-इंजन’ सरकार द्वारा ओडिशा के साथ किया गया विश्वासघात करार दिया। यहां हुई एक संयुक्त बैठक में इन दलों के नेताओं ने आरोप लगाया कि इस स्थानांतरण से ईस्ट कोस्ट रेलवे जोन का आकार छोटा हो जाएगा और उसके राजस्व में गिरावट आएगी।

–आईएएनएस

एससीएच

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