चंडीगढ़, 25 जून (आईएएनएस)। राज्यसभा सदस्य विक्रमजीत सिंह साहनी ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने सोशल मीडिया पर अकाल तख्त, जत्थेदारों और सिख धर्म के पूजनीय संस्थानों को निशाना बनाकर फैलाई जा रही नफरत, अपमानजनक और भड़काऊ सामग्री के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
साहनी ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के ऐसे प्रयासों का हमारे समाज में कोई स्थान नहीं है। मैंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया है ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके और ऐसी गैरकानूनी सामग्री को तुरंत हटाया जा सके।
उन्होंने कहा कि इन पोस्टों की समन्वित प्रकृति से आशंकाएं बढ़ जाती हैं कि इन्हें पंजाब की सत्ताधारी पार्टी के इशारे पर फैलाया जा रहा है।
साहनी ने आपत्तिजनक पोस्टों के स्क्रीनशॉट वाली एक फाइल संलग्न की है, जिसमें उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहब के खिलाफ अपमानजनक और भड़काऊ टिप्पणियां हैं और सिख धर्म के सर्वोच्च संस्थानों में से एक की पवित्रता को ठेस पहुंचाई गई है।
सांसद ने कहा कि इस तरह की सामग्री भारत और विदेशों में लाखों सिखों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाती है, और इससे सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है।
उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने ऑनलाइन घृणास्पद भाषण और सांप्रदायिक नफरत फैलाने और लक्षित दुर्व्यवहार के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग का मुद्दा लगातार उठाया है।
सहनी ने कहा कि संसद में, मैंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर घृणास्पद भाषण को रोकने के लिए एक मजबूत कानूनी ढांचा स्थापित करने हेतु निजी सदस्य विधेयक, 2024, ऑनलाइन घृणास्पद भाषण (रोकथाम) विधेयक पेश किया था। मैंने कई बार सरकार से संस्थागत तंत्र को मजबूत करने का आग्रह किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म घृणा भड़काने वाली या किसी धर्म या समुदाय को लक्षित करने वाली सामग्री के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करें।
उन्होंने आगे कहा कि भारत की सभ्यतागत विचारधारा सभी धर्मों के प्रति आपसी सम्मान पर आधारित है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मूल्य है, लेकिन इसका विस्तार धार्मिक संस्थानों की निंदा या जानबूझकर उकसाने तक नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया का ऐसा दुरुपयोग न केवल सामाजिक सद्भाव को कमजोर करता है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर जनता के विश्वास को भी कम करता है।
–आईएएनएस
एमएस/
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