आरजी कर मामले के बाद महसूस हो गया था टीएमसी चुनाव हारने वाली है: सुखेंदु शेखर रॉय

Summary :

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। राज्यसभा की सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि आरजी कर रेप और मर्डर केस उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने महसूस किया कि इस घटना के बाद जनता में जो गुस्सा दिखा, उससे साफ था कि पार्टी विधानसभा चुनाव हारने वाली है। पत्रकारों से बात करते हुए सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे के तौर पर मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। मुझ पर न तो कोई दबाव डाला गया और न ही मुझे बहकाया गया। यह मेरा…

नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। राज्यसभा की सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के एक दिन बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि आरजी कर रेप और मर्डर केस उनके लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने महसूस किया कि इस घटना के बाद जनता में जो गुस्सा दिखा, उससे साफ था कि पार्टी विधानसभा चुनाव हारने वाली है।

पत्रकारों से बात करते हुए सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि एक स्वतंत्रता सेनानी के बेटे के तौर पर मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी। मुझ पर न तो कोई दबाव डाला गया और न ही मुझे बहकाया गया। यह मेरा निजी फैसला था।

उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगा कि अब बहुत हो चुका। मैं काफी समय से पार्टी छोड़ने के बारे में सोच रहा था।

हालांकि, रॉय ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर सेवा करने का मौका देने के लिए तृणमूल नेतृत्व का आभार भी जताया।

उन्होंने कहा कि पार्टी में कई अच्छे नेता हैं, लेकिन फिर यौन उत्पीड़न के मामले सामने आने लगे, जैसे पार्क स्ट्रीट रेप केस, कामदुनी गैंग रेप और मर्डर केस और आखिरकार आरजी कर रेप और मर्डर केस।

उन्होंने आरोप लगाया कि यौन उत्पीड़न के कई मामलों में शामिल लोगों को तृणमूल कांग्रेस का संरक्षण मिला हुआ था और उनमें से कुछ तो पार्टी कार्यकर्ता थे या पार्टी की गतिविधियों से जुड़े थे। जब ऐसी घटनाएं हुई तो मेरे दोस्तों और परिवार वालों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि मैं अभी भी इस पार्टी का हिस्सा क्यों हूं। साथ ही मैं उनके गलत कामों का हिस्सा क्यों बनूं, लेकिन मैं इस्तीफा देने के मौके का इंतजार कर रहा था और जब आरजी कर की घटना हुई तो मैंने (तृणमूल छोड़ने का) फैसला कर लिया।

पूर्व तृणमूल सांसद ने कहा कि आरजी कर मामले के बाद जिन लोगों ने पांच महीने पहले लोकसभा चुनाव में पार्टी को वोट दिया था। वे ही सड़कों पर उतर आए।

उन्होंने कहा कि हमें सोचना चाहिए था कि अगर जनता सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार को 34 साल बाद सत्ता से हटाकर तृणमूल को सत्ता में ला सकती है तो अगर हम सही रास्ते पर नहीं चले तो वे हमें भी हटा सकती है।

इसके अलावा सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि अब बस कुछ महीने या कुछ साल की बात है और तृणमूल कांग्रेस इतिहास का हिस्सा बन जाएगी। यह अपने मौजूदा रूप में नहीं टिक पाएगी।

हमारी पार्टी में कई अन्य लोग जिन्हें दरकिनार महसूस हुआ, उन्होंने भी हमसे कहा कि वे अब और नहीं रहना चाहते। जनता ने बार-बार संकेत दिए, लेकिन पार्टी ने वे सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जिनकी उससे उम्मीद थी।

उन्होंने कहा कि लेफ्ट के 34 साल के शासन और उसके बाद तृणमूल के 15 साल के शासन ने पश्चिम बंगाल को रेगिस्तान बना दिया है। यहां कोई निवेश नहीं है, बेरोजगारी कम करने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए हैं और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। लोगों के पास भाजपा के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, सलाइन और इंजेक्शन खरीदे जा रहे हैं। मैंने फोरेंसिक ऑडिट की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में मैं बेबस हो गया था और आखिरकार मैंने पार्टी और राज्यसभा, दोनों से अपना इस्तीफा दे दिया।

सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि उन्हें पक्का नहीं पता कि वे राजनीति में बने रहेंगे या नहीं। भाजपा की नई सरकार की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने घोषणापत्र में किए गए वादों पर काम करना शुरू भी कर दिया है।

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)

News Desk

News Desk is the editorial team of Punjab Kesari. This article is based on information provided by IANS.