बिहार: राजद ने नीतीश कुमार पर जदयू अध्यक्ष पद बरकरार रखने को लेकर निशाना साधा

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नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। मंगलवार को नीतीश कुमार के निर्विरोध रूप से जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। मीसा भारती और तेजस्वी यादव ने वंशवादी राजनीति से लेकर सत्ताधारी पार्टी के आंतरिक फैसलों तक के मुद्दों पर राजनीतिक हमले किए। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद सांसद मीसा भारती ने कहा कि नीतीश कुमार का एक बार फिर जदयू अध्यक्ष बनना अच्छी बात है, लेकिन तुरंत ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के वंशवादी राजनीति पर रुख में विरोधाभास बताते हुए उनकी आलोचना की। भारती ने…

नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। मंगलवार को नीतीश कुमार के निर्विरोध रूप से जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। मीसा भारती और तेजस्वी यादव ने वंशवादी राजनीति से लेकर सत्ताधारी पार्टी के आंतरिक फैसलों तक के मुद्दों पर राजनीतिक हमले किए।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजद सांसद मीसा भारती ने कहा कि नीतीश कुमार का एक बार फिर जदयू अध्यक्ष बनना अच्छी बात है, लेकिन तुरंत ही उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री के वंशवादी राजनीति पर रुख में विरोधाभास बताते हुए उनकी आलोचना की।

भारती ने उनके बेटे निशांत कुमार के हालिया राजनीतिक प्रवेश का जिक्र करते हुए कहा कि नीतीश कुमार के बारे में मुझे जो सबसे अच्छी बात लगी, वह यह है कि अब वे वंशवादी राजनीति पर नहीं बोलेंगे। उन्होंने अपने बेटे (निशांत कुमार) को राजनीति में उतारा है। इसलिए कम से कम अब वे वंशवादी राजनीति पर नहीं बोलेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मेरी ओर से उन्हें (नीतीश कुमार को) बहुत-बहुत शुभकामनाएं। वे स्वस्थ रहें और दिल्ली आकर कम से कम उपप्रधानमंत्री का पद तो प्राप्त करें। नीतीश कुमार के लिए हमारी यही कामना है।

इस बीच, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के अपनी ही पार्टी में दबदबे पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि असली सत्ता कहीं और है।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार जदयू अध्यक्ष बन गए हैं, लेकिन फैसले उनके द्वारा नहीं लिए जा रहे हैं। जदयू में तीन-चार लोग ऐसे हैं जो नीतीश कुमार को नेता बनाकर असल में फैसले ले रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इन लोगों का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता है, जिसका मकसद जदयू को अंदर से कमजोर करना है।

विपक्ष के नेता यादव ने दावा किया कि उन्होंने भाजपा के साथ जदयू को खत्म करने की योजना बनाई है और वे इस काम में लगे हुए हैं।

22 मार्च की समय सीमा तक किसी अन्य उम्मीदवार द्वारा नामांकन पत्र दाखिल न किए जाने के कारण निर्धारित आंतरिक चुनाव निरर्थक हो गया, और नीतीश कुमार जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध पुनः निर्वाचित हो गए।

यह जदयू के शीर्ष पर इस अनुभवी नेता का एक और कार्यकाल है, जो पार्टी की संगठनात्मक संरचना पर उनकी निरंतर पकड़ को और मजबूत करता है।

–आईएएनएस

एमएस/

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