बेंगलुरु, 17 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष यूटी खादर ने मंगलवार को कहा कि विधायकों के सवालों के जवाब देने में हो रही देरी का सरकार ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। संबंधित मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे शीघ्रता से जवाब प्रस्तुत करें।
यह मुद्दा सोमवार को स्पीकर द्वारा विधानसभा स्थगित करने के एक दिन बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने बार-बार चेतावनी के बावजूद गैर-तारांकित प्रश्नों के उत्तर देने में विफल रहने के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की कड़ी आलोचना की थी।
गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सदन को सूचित किया कि दिन के लिए सूचीबद्ध 221 में से केवल 58 सवालों के जवाब विधानसभा के समक्ष रखे जाएंगे। सरकार ने इस मामले पर पहले ही चर्चा कर ली है और सुधारात्मक कदम उठाए हैं।
परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने सोमवार को इस मामले को गंभीरता से लिया था और मंत्रियों और मुख्य सचिव को निर्देश जारी किए थे। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी थी कि यदि जवाब नहीं दिए गए तो निलंबन का आदेश दिया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्थिति अगले दिन से सुधर जाएगी।
स्पीकर खादर ने विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की स्थिति का भी विस्तृत विवरण दिया और बताया कि कई मंत्रालय बड़ी संख्या में प्रश्नों के उत्तर देने में विफल रहे हैं।
उनके अनुसार, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (डीपीएआर) को 23 प्रश्न प्राप्त हुए थे, लेकिन उसने केवल छह के उत्तर दिए। वित्त विभाग ने 33 प्रश्नों में से छह का उत्तर दिया था। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने पूछे गए नौ प्रश्नों में से किसी का भी उत्तर नहीं दिया था और युवा सशक्तीकरण एवं खेल विभाग भी उसे भेजे गए 10 प्रश्नों में से किसी का भी उत्तर देने में विफल रहा था।
इसी प्रकार, सहकारिता विभाग ने 12 प्रश्नों में से किसी का भी उत्तर नहीं दिया था, जबकि जल संसाधन विभाग ने 33 प्रश्नों में से केवल चार का उत्तर दिया था। शहरी विकास विभाग ने 21 प्रश्नों में से 8 का उत्तर दिया था, और पर्यटन विभाग ने 25 प्रश्नों में से केवल 1 का उत्तर दिया था। इसके विपरीत, लघु सिंचाई विभाग ने 13 प्रश्नों में से 8 का उत्तर दिया था।
खादर ने कहा कि इस मामले पर सोमवार को चर्चा हुई थी और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने जवाब सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि जवाब तैयार करने में दो से तीन दिन लग सकते हैं, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए।
इसी बीच, भाजपा विधायक महेश तेंगीनकाई ने मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा उनके सवालों के जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब तक जवाब मिलेंगे, तब तक विधानसभा सत्र समाप्त हो चुका होगा और इसके बाद जवाबों का क्या उपयोग होगा?
स्पीकर खादर ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विधायक समय की पाबंदी के लिए जाने जाते हैं और उनका निराश होना स्वाभाविक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे मुख्यमंत्री से बात करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें उनके सवालों के जवाब मिल जाएं।
सोमवार को खादर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को कई बार समय पर जवाब तैयार करने की चेतावनी दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर विधायकों के सवालों का जवाब नहीं दिया जाता है तो उनसे विधानसभा में उपस्थित होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
स्थिति में कोई सुधार न होने की बात कहते हुए अध्यक्ष ने पूछा कि इस प्रकार की लापरवाही जारी रही तो सदन सुचारू रूप से कैसे चल सकता है। उन्होंने घोषणा की कि जब तक मंत्री और अधिकारी देरी के कारणों का स्पष्टीकरण नहीं देते, तब तक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी, और इसके बाद सदन को स्थगित कर दिया।
–आईएएनएस
एएसएच/एबीएम
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