क्या केरल के मुख्यमंत्री सतीशन आरटीओ के एजेंट राज के पुराने अभिशाप को तोड़ पाएंगे?

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तिरुवनंतपुरम, 28 अगस्त (आईएएनएस)। मलप्पुरम में 35 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक की दुखद आत्महत्या ने केरल के मोटर वाहन विभाग में लंबे समय से चली आ रही एजेंट संस्कृति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। मृतक ने स्वयं इस व्यवस्था को अपने उत्पीड़न और कथित भ्रष्टाचार का प्रमुख कारण बताया है। अब सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की सरकार अंततः उस व्यवस्था को समाप्त कर पाएगी, जिसे पिछली एलडीएफ सरकार सहित कई सरकारें खत्म करने में विफल रही हैं। शौकत गुरुवार को किझिस्सेरी स्थित अपने घर में मृत पाए गए। उन्होंने अपनी मृत्यु से…

तिरुवनंतपुरम, 28 अगस्त (आईएएनएस)। मलप्पुरम में 35 वर्षीय ऑटो रिक्शा चालक की दुखद आत्महत्या ने केरल के मोटर वाहन विभाग में लंबे समय से चली आ रही एजेंट संस्कृति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। मृतक ने स्वयं इस व्यवस्था को अपने उत्पीड़न और कथित भ्रष्टाचार का प्रमुख कारण बताया है।

अब सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की सरकार अंततः उस व्यवस्था को समाप्त कर पाएगी, जिसे पिछली एलडीएफ सरकार सहित कई सरकारें खत्म करने में विफल रही हैं।

शौकत गुरुवार को किझिस्सेरी स्थित अपने घर में मृत पाए गए। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया था कि एजेंट के माध्यम से संपर्क करने के बजाय सीधे कोंडोट्टी सब-आरटीओ से संपर्क करने पर उन्हें अपने ऑटो रिक्शा के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया गया था।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने ऑटो रिक्शा के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करने के प्रयास में लगभग 10 महीने बिताए, जिसके कारण वे अपनी आजीविका के एकमात्र साधन को चलाने में असमर्थ हो गए।

उनके आरोप उनके व्यक्तिगत कष्टों से कहीं अधिक व्यापक थे।

शौकत ने एजेंट प्रणाली को एमवीडी के भीतर भ्रष्टाचार का एक प्रमुख स्रोत बताया और तर्क दिया कि यदि इस प्रणाली को समाप्त कर दिया जाए तो कथित भ्रष्टाचार का अधिकांश भाग समाप्त किया जा सकता है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एजेंट कई सेवाओं के लिए शुल्क तय करते हैं और आरटीओ कार्यालयों के अधिकारी ऐसे लेन-देन को सुगम बनाते हैं।

केरल के परिवहन कार्यालयों में यह व्यवस्था लंबे समय से एक खुला रहस्य रही है।

वाहन मालिक अक्सर फिटनेस प्रमाणन और स्वामित्व हस्तांतरण से लेकर परमिट और अन्य दस्तावेजों तक की सेवाओं के लिए बिचौलियों पर निर्भर रहते हैं।

नागरिकों और सरकारी अधिकारियों के बीच बिचौलियों की मौजूदगी ने जवाबदेही पर बार-बार सवाल उठाए हैं, और आरोप हैं कि अनौपचारिक शुल्क इस प्रक्रिया का हिस्सा बन गए हैं।

परिवहन मंत्री सीपी जॉन ने परिवहन आयुक्त नागराजू चकिलम से रिपोर्ट मांगी है, जबकि मुख्यमंत्री सतीशन ने आधिकारिक उत्पीड़न के आरोपों के बाद व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। परिवहन सचिव टीवी अनुपमा को दो दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने कथित तौर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है और सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने का आरोप लगाया है।

हालांकि, उनका यह राजनीतिक हमला एक असहज पृष्ठभूमि के साथ आया है, क्योंकि विजयन के मुख्यमंत्री रहते हुए एलडीएफ के एक दशक के शासनकाल में भी बिचौलियों की संस्कृति को पूरी तरह से समाप्त नहीं किया जा सका था।

इससे मौजूदा संकट इस बात का सवाल कम रह जाता है कि कौन सा राजनीतिक दल इसके लिए जिम्मेदार है और इस बात की परीक्षा ज्यादा कि क्या मुख्यमंत्री सतीशन वो कर सकते हैं जो उनसे पहले की सरकारें नहीं कर पाईं, यानी एजेंटों और अधिकारियों के बीच सांठगांठ को तोड़कर आरटीओ प्रणाली को बिचौलियों के बिना वास्तव में सुलभ बना सकते हैं।

शौकत की मौत की महज जांच से व्यक्तिगत दोष सिद्ध हो सकता है।

हालांकि, जब तक सरकार उस गहरे एजेंट-चालित तंत्र से नहीं निपटती जिसे उन्होंने खुद पहचाना है, तब तक यह त्रासदी केरल के संकटग्रस्त आरटीओ के इतिहास में एक और मामला बनकर रह जाने का जोखिम रखती है।

मुख्यमंत्री सतीशन ने मृतक के परिवार से बात की और कार्रवाई का वादा किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वे एजेंट संस्कृति को पूरी तरह से मिटा पाएंगे और यही अब देखना बाकी है।

–आईएएनएस

एमएस/

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IANS Agency

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