पुणे, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति गंभीर होने के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने शुक्रवार को पुणे जिले के प्रभावित इलाकों का दौरा शुरू किया। इस दौरान उन्होंने फसलों को हुए नुकसान का जायजा लिया और किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं।
शरद पवार ने सूखे से ज्यादा प्रभावित बारामती, पुरंदर और दौंड तालुका के खेतों का दौरा कर जमीनी हालात का जायजा लिया।
पुरंदर तालुका के परिंचे गांव में स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान पवार ने राज्य सरकार से किसानों का 100 प्रतिशत कृषि कर्ज तुरंत माफ करने और राहत के अन्य जरूरी कदम उठाने की मांग की।
परिंचे में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा, ”बारिश की कमी के कारण किसानों और पशुओं के लिए जीवन मुश्किल हो गया है। मैंने 27 सितंबर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पुरंदर और सूखा प्रभावित सूची से बाहर रखे गए अन्य तालुका को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की थी। फिलहाल मेरी प्राथमिकता सरकार पर जल्द कदम उठाने के लिए दबाव बनाना है, ताकि खेतों में बची फसलों को बचाया जा सके।”
शरद पवार ने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ इलाकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है लेकिन पुरंदर समेत कई प्रभावित क्षेत्र अभी भी आधिकारिक सूची से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि संकट इतना गंभीर है कि राज्य सरकार को सीधे हस्तक्षेप करने की जरूरत है।
उन्होंने पुरंदर सहित सूची से बाहर रह गए प्रभावित तालुका को राज्य की सूखा राहत व्यवस्था में शामिल करने और प्रभावित किसानों के कृषि एवं उससे जुड़े सभी कर्ज को 100 प्रतिशत माफ करने की मांग की।
शरद पवार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वह व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात करेंगे और उनकी मांगें सरकार के सामने रखेंगे।
सरकार के साथ पहले हुई बातचीत का जिक्र करते हुए शरद पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस जमीनी हालात से मिली जानकारी पर विचार करने के लिए सहमत हुए थे।
उन्होंने कहा, ”मैंने मुख्यमंत्री को बताया है कि मैं खुद गांवों का दौरा कर लोगों की राय और उनकी समस्याओं की जानकारी ले रहा हूं। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि जल्द ही उनसे मुलाकात करूंगा, आपकी समस्याएं उनके सामने रखूंगा और जल्द समाधान की मांग करूंगा।”
शरद पवार ने मुख्यमंत्री फडणवीस को लिखे पत्र में सरकार से तुरंत हस्तक्षेप करने और किसानों, खेतिहर मजदूरों तथा छात्रों की मदद के लिए 17 सूत्रीय राहत पैकेज देने की मांग की। राज्य के 265 तालुका को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के बाद उन्होंने ये मांगें रखीं।
सूखा प्रभावित इलाकों में कृषि संकट और ग्रामीण लोगों की आर्थिक परेशानियों को देखते हुए पवार ने प्रशासन से मौजूदा सहायता योजनाओं का दायरा बढ़ाने और आगामी त्योहारों से पहले तुरंत राहत पहुंचाने की अपील की।
उन्होंने सरकार से बाकी सभी प्रभावित तालुका को भी सूखाग्रस्त घोषित करने और पूरे राज्य में भूमि राजस्व शुल्क पूरी तरह माफ करने की मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने सहकारी, राष्ट्रीयकृत, शहरी और समाज कल्याण से जुड़े वित्तीय संस्थानों से किसानों, खेतिहर मजदूरों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और छोटे उद्यमों को दिए गए कृषि कर्ज तथा रोजगार-व्यवसाय से जुड़े कर्ज को भी पूरी तरह माफ करने की मांग की।
शरद पवार ने कृषि पंपों के बिजली बिल माफ करने की भी मांग की। साथ ही सूखाग्रस्त घोषित इलाकों में बिजली कनेक्शन काटने या बिजली कटौती पर पूरी तरह रोक लगाने को कहा।
उन्होंने सूखा प्रभावित परिवारों के स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की ट्यूशन फीस, हॉस्टल फीस और मेस फीस माफ करने की भी मांग की।
एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार ने ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’, जिसे पहले मनरेगा के नाम से जाना जाता था, के नियमों में ढील देने की मांग की। उन्होंने कहा कि रोजगार की मांग वाले स्थान से तीन किलोमीटर के दायरे में तुरंत स्थानीय रोजगार के काम शुरू किए जाने चाहिए।
उन्होंने नागरिकों और पशुओं के लिए पीने के पानी के टैंकरों को मंजूरी देने का अधिकार सीधे तहसीलदारों को देने की मांग की, ताकि जरूरत के समय प्रशासनिक मंजूरी में देरी न हो।
पवार ने खेतिहर मजदूरों और कृषि से जुड़े परिवारों को प्रति परिवार 25 किलो मुफ्त अनाज देने तथा पशुओं की देखभाल के लिए दी जाने वाली सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा करने की भी मांग की।
उन्होंने किसानों को तत्काल प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता और भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को 25 हजार रुपए की मदद देने की मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने प्रभावित फल बागानों और केला, गन्ना तथा धान की फसलों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता एवं पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की मांग की।
पवार ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सभी लंबित राशि तुरंत जारी करने और राहत की पूरी राशि सीधे संभागीय आयुक्तों तथा जिला कलेक्टरों को उपलब्ध कराने की भी मांग की।
उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र विधानमंडल का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की, ताकि सूखे की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की जा सके, महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए जा सकें और दशहरा तथा दिवाली से पहले प्रभावित लोगों तक सभी तरह की आर्थिक सहायता पहुंचाई जा सके।
–आईएएनएस
एएमटी/पीएम
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