प्रगति के साथ करुणा और समाज के कमजोर वर्गों की चिंता जरूरी: एलजी सिन्हा

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श्रीनगर, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि विकास और प्रगति का रास्ता करुणा तथा समाज के सबसे कमजोर वर्गों की चिंता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानवता, सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हो। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि तकनीक, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के संवाद करने और सूचनाओं तक पहुंचने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। हालांकि,…

श्रीनगर, 2 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को कहा कि विकास और प्रगति का रास्ता करुणा तथा समाज के सबसे कमजोर वर्गों की चिंता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है, जब वह मानवता, सत्य और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी हो।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (एसकेआईसीसी) में गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि तकनीक, स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने लोगों के संवाद करने और सूचनाओं तक पहुंचने के तरीके को तेजी से बदल दिया है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी विकास की दिशा मानव मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी से तय होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का दर्शन आज तेजी से बदलती दुनिया में आगे बढ़ने के लिए महत्वपूर्ण सीख देता है। गांधी जयंती केवल महात्मा गांधी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके विचारों पर चिंतन करने और मौजूदा समय में उनकी प्रासंगिकता को समझने का भी अवसर है।

सिन्हा ने कहा कि गांधी के जीवन से यह सीख मिलती है कि सत्य केवल एक विचार नहीं, बल्कि ऐसा सिद्धांत है जिसे जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक ने दुनिया को पहले से कहीं ज्यादा करीब ला दिया है और सूचनाएं कुछ ही क्षणों में पूरी दुनिया में पहुंच जाती हैं। लेकिन अगर सूचनाओं को बिना सत्यापन के स्वीकार या साझा किया जाए तो यही तकनीक नई चुनौतियां भी पैदा कर सकती है।

उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया, स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सत्य को केंद्र में बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी सूचना पर विश्वास करने या उस पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसका सत्यापन जरूर करें।

उन्होंने कहा, “तकनीक एक शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाता है, यही तय करता है कि यह मानवता की सेवा करेगी या नई चुनौतियां पैदा करेगी।”

सिन्हा ने युवाओं से तकनीक का इस्तेमाल शिक्षा, नवाचार, रोजगार और समाज की भलाई के लिए करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तकनीक को विभाजन या गलत सूचना का माध्यम नहीं बनने देना चाहिए। तकनीकी विकास की तेज रफ्तार बच्चों और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि प्रगति समावेशी हो और उसका लाभ पूरे समाज तक पहुंचे।

उपराज्यपाल ने कहा कि गांधी की दृष्टि समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों की ओर देखने की भी प्रेरणा देती है। विकास की वास्तविक कसौटी यह होनी चाहिए कि उन लोगों के जीवन में कितना सुधार आया, जिन्हें सबसे अधिक सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि न्याय, दूसरों के प्रति सम्मान और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता विकास प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश की यात्रा आर्थिक और तकनीकी प्रगति की रफ्तार के साथ करुणा और मानवीय मूल्यों को जोड़कर आगे बढ़नी चाहिए। जम्मू-कश्मीर भी आधुनिक शिक्षा, तकनीक और बुनियादी ढांचे के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों को जोड़कर इस यात्रा में योगदान दे सकता है।

सिन्हा ने कहा कि विकास का अर्थ अपनी जड़ों से दूर होना नहीं है। आधुनिकता और परंपरा को साथ लेकर चलना जरूरी है। उन्होंने शिक्षा के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि स्कूल और शिक्षण संस्थान केवल ज्ञान और कौशल ही न दें, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र, जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित करें।

उन्होंने कहा कि गांधी की शिक्षा संबंधी सोच वास्तविक जीवन से जुड़ी सीख और समाज के हित में उसके इस्तेमाल पर जोर देती थी। शिक्षकों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे ऐसे नागरिकों के निर्माण में भूमिका निभाते हैं जो सक्षम होने के साथ-साथ जिम्मेदार और संवेदनशील भी हों।

उपराज्यपाल ने कहा कि अलग-अलग विचारों का सम्मान करना गांधी के संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के दौर में विचारों की असहमति को दुश्मनी का कारण नहीं बनना चाहिए। उन्होंने संवाद, विविधता और प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा के सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया।

सिन्हा ने कहा कि गांधी की विरासत यह भी सिखाती है कि प्रत्येक नागरिक की समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी है। विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं, जो तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत, सामाजिक रूप से समावेशी और मानवीय एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा हो।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी, जब उनके सिद्धांतों को रोजमर्रा के आचरण में उतारा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

–आईएएनएस

डीएससी

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IANS Agency

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