चेन्नई, 25 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को छह निर्वाचन क्षेत्रों में चुने हुए प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति (वहां के विधायकों के इस्तीफे के बाद) को लेकर तीखी बहस हुई।
यह मुद्दा प्राकृतिक संसाधनों, उद्योगों, सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभागों के लिए अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान उठा।
चर्चा में भाग लेते हुए डीएमके विधायक ऑस्टिन ने पूछा कि विधायकों की अनुपस्थिति में इन छह निर्वाचन क्षेत्रों के निवासी अपनी शिकायतें लेकर किसके पास जाएं।
मंत्री केए सेंगोट्टैयन ने जवाब में कहा कि सरकार ने सभी छह निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए हैं कि जनता की शिकायतें सुनी जाएं और स्थानीय जरूरतों को पूरा किया जाए।
हालांकि, ऑस्टिन का कहना था कि कई समस्याएं अभी भी अनसुलझी हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अतिरिक्त जिम्मेदारी वाले मंत्री निर्वाचन क्षेत्र-स्तर के मुद्दों को पूरी तरह से नहीं समझ सकते जिससे चुने हुए प्रतिनिधियों की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि विधायकों के होने का मुख्य उद्देश्य ही समर्पित प्रतिनिधित्व प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि पूरे विभागों को संभालने वाले मंत्रियों से हर स्थानीय चिंता को समझने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
सेंगोट्टैयन ने जवाब दिया कि सरकार भी इन छह निर्वाचन क्षेत्रों में जल्द से जल्द चुनाव कराने की इच्छुक है। उन्होंने कहा, “चुनाव कराने का कोई विकल्प नहीं है और हम यह सुनिश्चित करने में रुचि रखते हैं कि वे जल्द से जल्द हों।”
उनकी इस टिप्पणी पर पलानीस्वामी और अन्य एआईएडीएमके सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया, जिससे तीखी बहस छिड़ गई। स्पीकर जेसी डी. प्रभाकर ने कहा कि लंबित कानूनी कार्यवाही से जुड़ी कुछ टिप्पणियों को विधानसभा के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा।
पलानीस्वामी का माइक्रोफोन बंद किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया। जब सेंगोट्टैयन ने कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त (हॉर्स-ट्रेडिंग) का जिक्र किया, तो स्पीकर ने उन्हें ऐसी टिप्पणियों से बचने की सलाह दी।
इसके बाद मंत्री ने पूछा कि क्या एडप्पादी निर्वाचन क्षेत्र से टीवीके उम्मीदवार का नाम वापस लेना खरीद-फरोख्त के बराबर नहीं था। पलानीस्वामी ने इस आरोप को सख्ती से खारिज करते हुए कहा कि उम्मीदवार ने नाम वापस नहीं लिया था बल्कि उसका नामांकन रद्द कर दिया गया था।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित व्यक्ति ने एक पार्टी छोड़कर टीवीके क्यों ज्वाइन की थी। जब पलानीस्वामी जोर-जोर से बोलते रहे, तो स्पीकर अपनी कुर्सी से उठे और पूछा कि क्या सदन को कोई जनसभा समझा जा रहा है।
पलानीस्वामी ने जवाब दिया कि अगर उन्हें बोलने नहीं दिया गया, तो उनके पास खड़े होने के अलावा कोई चारा नहीं था। स्पीकर ने उनसे शांत रहने और खुद पर शारीरिक जोर न डालने की सलाह दी। इसके बाद विरोध-प्रदर्शन के बीच कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
–आईएएनएस
एएसएच/पीएम
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