तमिलनाडु सरकार ने कक्षा 6 से 8 तक नाश्ता योजना के विस्तार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया जारी की

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चेन्नई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु महिला विकास निगम ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना’ का विस्तार करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है। गाइडलाइंस के तहत, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के चुने हुए सदस्य नाश्ता तैयार करेंगे और परोसेंगे। आवेदकों के पास एसएचजी में कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए, उन्हें उसी गांव या नगर पंचायत में रहना चाहिए जहाँ स्कूल है, और उन्हें खाना पकाने की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उनके…

चेन्नई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु महिला विकास निगम ने राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए ‘पेरुंथलैवर कामराजर नाश्ता योजना’ का विस्तार करने के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) जारी किया है।

गाइडलाइंस के तहत, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े स्वयं-सहायता समूहों (एसएचजी) के चुने हुए सदस्य नाश्ता तैयार करेंगे और परोसेंगे। आवेदकों के पास एसएचजी में कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए, उन्हें उसी गांव या नगर पंचायत में रहना चाहिए जहाँ स्कूल है, और उन्हें खाना पकाने की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उनके बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते होने चाहिए।

चुने गए सदस्यों की पढ़ाई कम से कम 10वीं कक्षा तक होनी चाहिए। हालाँकि, पहाड़ी, आदिवासी और दूर-दराज़ के इलाकों में कम से कम योग्यता को घटाकर 8वीं कक्षा कर दिया गया है।

उनके पास इंटरनेट वाला एंड्राइड फोन होना चाहिए और बैंक या फ़ेडरेशन के लोन चुकाने का उनका रिकॉर्ड अच्छा होना चाहिए।

प्रोग्राम शुरू होने से पहले, एसएचजी सदस्यों को खाना पकाने, फ़ूड सेफ़्टी, साफ़-सफ़ाई से काम करने, रजिस्टर बनाए रखने और स्कीम के मोबाइल ऐप के ज़रिए डेटा सबमिट करने की ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।

तय मेन्यू के हिसाब से ट्रेनिंग, काम शुरू होने से कम से कम 15 दिन पहले पूरी हो जानी चाहिए। खाना पकाने का काम सुबह 6 बजे शुरू होकर 8 बजे तक पूरा हो जाना चाहिए। गरमा-गरम नाश्ता सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच परोसा जाना चाहिए।

इसके बाद बर्तन साफ किए जाने चाहिए और काम करने वालों को सुबह 9.30 बजे तक स्कूल से निकल जाना चाहिए। चावल, दाल, खाना पकाने का तेल और नमक स्थानीय स्तर पर नहीं खरीदे जा सकते; इनकी सप्लाई तमिलनाडु सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के ज़रिए की जानी चाहिए। सब्जियां स्थानीय स्तर पर खरीदी जा सकती हैं या स्कूल और पंचायत के बगीचों में उगाई जा सकती हैं।

जिन स्कूलों में 10 से कम छात्र हैं, उन्हें पास के बड़े कुकिंग सेंटरों से खाना मिल सकता है। ऐसे स्कूलों में नाश्ता पहुंचाने वाले एसएचजी सदस्यों को डिस्ट्रीब्यूशन चार्ज के तौर पर 1,500 रुपये दिए जाएंगे।

एसओपी में क्वालिटी, साफ-सफाई और जवाबदेही पक्की करने के लिए रोज़ाना रजिस्टर रखने, मोबाइल ऐप के ज़रिए फ़ोटो के साथ रिपोर्टिंग करने, खाने के सैंपल सुरक्षित रखने, नियमित जांच, स्वतंत्र मूल्यांकन और सोशल ऑडिट की भी ज़रूरत बताई गई है।

–आईएएनएस

एसएके/पीएम

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IANS Agency

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