तमिलनाडु के 12 नगर निगमों में कचरा प्रबंधन के लिए नए पीपीपी मॉडल की तैयारी, कर्मचारियों ने जताई चिंता

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चेन्नई, 21 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में 12 प्रमुख नगर निगमों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को नए सिरे से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए तमिलनाडु अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (टीएनयूआईएफएसएल) ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (डीएफआर) तैयार करने और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी सेवाएं देने के लिए कंसल्टेंसी फर्मों से निविदाएं आमंत्रित की हैं। इस प्रस्तावित योजना में अवाडी, होसुर, तांबरम, वेल्लोर, कोयंबटूर, इरोड, सलेम, तिरुप्पुर, मदुरै, तूतीकोरिन, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली नगर निगम शामिल हैं। परियोजना के लिए कंसल्टेंसी कार्य को तीन पैकेजों में बांटा गया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत…

चेन्नई, 21 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में 12 प्रमुख नगर निगमों में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को नए सिरे से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए तमिलनाडु अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (टीएनयूआईएफएसएल) ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (डीएफआर) तैयार करने और ट्रांजैक्शन एडवाइजरी सेवाएं देने के लिए कंसल्टेंसी फर्मों से निविदाएं आमंत्रित की हैं।

इस प्रस्तावित योजना में अवाडी, होसुर, तांबरम, वेल्लोर, कोयंबटूर, इरोड, सलेम, तिरुप्पुर, मदुरै, तूतीकोरिन, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली नगर निगम शामिल हैं।

परियोजना के लिए कंसल्टेंसी कार्य को तीन पैकेजों में बांटा गया है, जिनकी कुल अनुमानित लागत 4.05 करोड़ रुपये है। यह पहल ऐसे समय में की जा रही है, जब ठोस कचरा प्रबंधन के लिए निजी एजेंसियों को दिए गए मौजूदा तीन वर्षीय अनुबंध समाप्ति के करीब हैं।

नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग द्वारा 24 अगस्त 2022 को जारी सरकारी आदेश (जीओ संख्या-116) के तहत तमिलनाडु के सभी नगर निगमों और नगरपालिकाओं को तीन वर्ष के लिए ठोस कचरा प्रबंधन कार्य निजी एजेंसियों के माध्यम से कराने की अनुमति दी गई थी।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सरकार मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर रही है क्योंकि इसके संचालन में कई कमियां सामने आई हैं। अधिकारियों ने सफाई मानकों को बनाए रखने, सेवा वितरण की निगरानी और परिचालन दक्षता सुनिश्चित करने में खामियों की पहचान की है। इसी कारण नए टेंडर जारी करने से पहले अनुबंध की शर्तों और संचालन ढांचे में बदलाव पर विचार किया जा रहा है।

प्रस्तावित कंसल्टेंसी फर्मों को ऐसी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे इन 12 नगर निगमों को कचरा-मुक्त शहरों में बदला जा सके। रिपोर्ट में ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 के अनुपालन को मजबूत करने और कचरे के संग्रहण, परिवहन तथा निपटान के लिए टिकाऊ व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि ये रिपोर्टें शहरी स्वच्छता में सुधार, जवाबदेही बढ़ाने और पीपीपी मॉडल के तहत बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के लिए रोडमैप प्रदान करेंगी।

हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर सफाई कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सफाई सेवाओं के निजीकरण से कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा कमजोर हुई है, कार्य परिस्थितियां प्रभावित हुई हैं और कल्याणकारी सुविधाओं में कमी आई है।

सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के आर. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि आउटसोर्सिंग के कारण कई कर्मचारियों को स्थायी नौकरी और श्रमिक अधिकारों से वंचित होना पड़ा है।

वहीं, चेन्नई में सफाई सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ लंबे आंदोलन का नेतृत्व कर चुके ‘उझाइप्पोर उरिमई इयक्कम’ के अध्यक्ष के. भारती ने राज्य सरकार से कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता देने और आगे के निजीकरण पर पुनर्विचार करने की मांग की। उनका आरोप है कि निजीकरण के विस्तार से मुख्य रूप से कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ होगा, जबकि कर्मचारियों को शोषण और असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा।

–आईएएनएस

डीएससी

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