त्रिपुरा में अवैध घुसपैठ पर सख्ती, 2022 से अब तक 3700 विदेशी नागरिक गिरफ्तार

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अगरतला, 31 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा में 2022 से अब तक भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में 3,705 से अधिक विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 3,463 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार वर्ष 2022 में 965 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए थे। इसके बाद 2023 में 1014, वर्ष 2024 में 947 और 2025 में अब तक 537 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है। अधिकांश विदेशी नागरिकों को कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उनके देशों में वापस भेज दिया गया है। फिलहाल 220 गिरफ्तार विदेशी नागरिक…

अगरतला, 31 मई (आईएएनएस)। त्रिपुरा में 2022 से अब तक भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने के आरोप में 3,705 से अधिक विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 3,463 बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं।

गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार वर्ष 2022 में 965 बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए थे। इसके बाद 2023 में 1014, वर्ष 2024 में 947 और 2025 में अब तक 537 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया है।

अधिकांश विदेशी नागरिकों को कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद उनके देशों में वापस भेज दिया गया है। फिलहाल 220 गिरफ्तार विदेशी नागरिक त्रिपुरा की विभिन्न जेलों में बंद हैं।

उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए कुल 3706 विदेशी नागरिकों में 227 रोहिंग्या हैं जबकि बाकी नाइजीरिया, कैमरून, गिनी, फ्रांस और पाकिस्तान जैसे देशों के नागरिक हैं।

हाल ही में त्रिपुरा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा था कि सरकार सीमा पार से होने वाली घुसपैठ को रोकने के लिए पूरी गंभीरता से काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि ढाका में सत्ता परिवर्तन के बाद गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप राज्य के सभी आठ जिलों में विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “एसटीएफ सिर्फ घुसपैठ रोकने का काम नहीं कर रही बल्कि संभावित आतंकी गतिविधियों, मादक पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय अपराधों पर भी कड़ी निगरानी रख रही है।”

गृह विभाग का भी प्रभार संभाल रहे मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के कुछ हिस्सों में विभिन्न कारणों से अभी भी कांटेदार तार की बाड़ पूरी नहीं हो सकी है।

उन्होंने कहा, “राज्य सरकार सीमा पार से होने वाली घुसपैठ के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी।” साथ ही फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को रोकने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

त्रिपुरा की 856 किलोमीटर लंबी सीमा बांग्लादेश से लगती है और राज्य तीन तरफ से बांग्लादेश से घिरा हुआ है। इसलिए यह क्षेत्र अवैध घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

राज्य के करीब 21 किलोमीटर हिस्से को छोड़कर अधिकांश सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है ताकि तस्करी, सीमा पार अपराध और अवैध आवाजाही को रोका जा सके।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जून-जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हिंसा शुरू होने और 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी व सुरक्षा और अधिक कड़ी कर दी गई है।

इस बीच, त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर घुसपैठ रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने यह निर्देश एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

यह याचिका वरिष्ठ नेता रंजीत देबबर्मा समेत तीन लोगों ने दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि गृह मंत्रालय के निर्देशों के बावजूद राज्य सरकार घुसपैठ रोकने के लिए पर्याप्त प्रभावी कदम नहीं उठा रही है।

रंजीत देबबर्मा ने कहा कि राज्य की आंतरिक सुरक्षा और आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए घुसपैठ को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि कई अवैध प्रवासी कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मदद से भारतीय पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज हासिल करने में सफल रहे हैं।

इन दस्तावेजों में आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, राशन कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी), स्वास्थ्य कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज शामिल हैं।

देबबर्मा ने कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों की भाषा, खानपान, शारीरिक बनावट और सांस्कृतिक विशेषताएं त्रिपुरा के कई स्थायी निवासियों से मिलती-जुलती हैं, जिससे अवैध घुसपैठियों की पहचान करना काफी कठिन हो जाता है।

मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि त्रिपुरा में करीब 1.48 लाख अवैध मतदाता रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर उन्होंने राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू, मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को कई पत्र लिखे हैं लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

–आईएएनएस

एएमटी/पीएम

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