गांधीनगर, 24 मार्च (आईएएनएस)। उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने मंगलवार को गुजरात विधानसभा में तर्क दिया कि प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) महिलाओं द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी असमानताओं को दूर करने के लिए आवश्यक है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा विधेयक पेश किए जाने के बाद हुई चर्चा के दौरान बोलते हुए सांघवी ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों से उत्पन्न असमानताओं ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है, जहां महिलाओं को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हमारा संविधान सभी को कानूनी अधिकार सुनिश्चित करता है, जो लोग वास्तव में संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं उन्हें यूसीसी का विरोध नहीं करना चाहिए।
उन्होंने प्रस्तावित ढांचे को चार स्तंभों – लैंगिक न्याय, वैधता, राष्ट्रीयता और लोकतंत्र पर आधारित बताया और कहा कि गुजरात उत्तराखंड के बाद इस संहिता को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाएगा।
उन्होंने गोवा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्वतंत्रता से पहले से ही समान नागरिक संहिता लागू है और वहां कभी कोई अन्याय नहीं हुआ।
सांघवी ने विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहे दलों ने तुष्टीकरण और रूढ़िवादी मानसिकता का पालन किया है।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा के इस कथन का जवाब देते हुए कि मसौदा रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए था, उन्होंने कहा कि यदि आपने विधेयक का अध्ययन किया होता, तो आप कम से कम दो धाराओं पर अपनी राय देते।
उन्होंने आगे कहा कि यूसीसी पर समिति की बैठकों के दौरान कांग्रेस सदस्यों का केवल एक ही मत था: “हमें अभी यूसीसी की आवश्यकता नहीं है।”
उन्होंने कहा कि गुजरात की जनता कांग्रेस की मानसिकता और विचारों का इंतजार नहीं करने वाली है।
सांघवी के अनुसार, परामर्श के दौरान लगभग 20 लाख सुझाव और प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुईं।
उन्होंने दोहराया कि प्रस्तावित कानून किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि यूसीसी का उद्देश्य समान कानूनी अधिकार सुनिश्चित करना है।
–आईएएनएस
एमएस/
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