भारत-चीन सीमा की अपुष्ट तस्वीरें वायरल, आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील

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नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत-चीन सीमा पर हो रहे घटनाक्रमों को दर्शाने वाली अपुष्ट तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं, जिससे गलत सूचना और भ्रम फैल रहा है। नागरिकों और मीडिया को सलाह दी जाती है कि वे केवल रक्षा मंत्रालय और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और ऑनलाइन प्रसारित हो रहे अप्रमाणित वीडियो या दावों को साझा करने से बचें। यह सलाह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी की गई है। नागरिकों और मीडिया को सलाह दी गई है कि वे कुछ सोशल मीडिया…

नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। भारत-चीन सीमा पर हो रहे घटनाक्रमों को दर्शाने वाली अपुष्ट तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं, जिससे गलत सूचना और भ्रम फैल रहा है।

नागरिकों और मीडिया को सलाह दी जाती है कि वे केवल रक्षा मंत्रालय और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और ऑनलाइन प्रसारित हो रहे अप्रमाणित वीडियो या दावों को साझा करने से बचें। यह सलाह प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) के प्रधान महानिदेशक कार्यालय की ओर से जारी की गई है।

नागरिकों और मीडिया को सलाह दी गई है कि वे कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही भारत-चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से संबंधित अपुष्ट तस्वीरों और भ्रामक दावों के प्रति सावधानी बरतें।

कुछ पोस्ट में सीमा के पास कथित तौर पर चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को दर्शाने वाली तस्वीरें साझा की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन तस्वीरों का सत्यापन नहीं हुआ है और इन्हें प्रामाणिक नहीं माना जाना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसी भ्रामक सामग्री को हटाने का अनुरोध किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि सीमा संबंधी मुद्दों पर बार-बार गलत सूचना फैलाने के प्रयासों के मद्देनजर यह सलाह जारी की गई है।

इससे पहले, वायरल पोस्टों में झूठा दावा किया गया था कि चीनी सेना भारतीय सीमा में 60 किलोमीटर अंदर तक घुस गई है।

पीआईबी की फैक्ट चेक रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया था कि यह दावा झूठा था और साथ में प्रसारित वीडियो का भारत-चीन सीमा से कोई संबंध नहीं था।

नागरिकों और मीडिया दोनों को सीमा संबंधी घटनाक्रमों के लिए केवल रक्षा मंत्रालय और भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

इन माध्यमों से जारी आधिकारिक बयान, तस्वीरें और वीडियो सूचना के सबसे विश्वसनीय स्रोत हैं।

अधिकारियों का कहना है कि सभी से आग्रह है कि ऑनलाइन कोई भी सामग्री साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि कर लें।

सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग गलत सूचना के प्रसार को रोकने में मदद करता है, और यह सुनिश्चित करता है कि जनता तक प्रामाणिक जानकारी पहुंचे।

चीनी सेना के भारत में 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने का पहले वायरल हुआ दावा फर्जी पाया गया था।

इस दावे के समर्थन में प्रसारित वीडियो का भारत-चीन सीमा से कोई संबंध नहीं था।

–आईएएनएस

एमएस/

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