नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार का अपने व्यस्त राजनीतिक दायित्वों से समय निकालकर मंच पर अभिनय करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इसकी वजह यह है कि पश्चिम बंगाल, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है, वहां कई राजनेता अभिनय से जुड़े रहे हैं, लेकिन राजनीति जैसे पूर्ण समर्पण वाले क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपनी कलात्मक रुचि को आगे बढ़ाने वाले नेताओं की संख्या बहुत अधिक नहीं रही है। हालांकि, बंगाल के लिए यह कोई बिल्कुल नई बात नहीं है, क्योंकि राज्य के इतिहास में ऐसे उदाहरण पहले भी देखने को मिले हैं।
दो दशक से भी पहले केंद्र में एक और बंगाली मंत्री अजीत पांजा ‘नटी बिनोदिनी’ के मंचन में श्री रामकृष्ण परमहंस का किरदार निभाकर काफी मशहूर हुए थे।
रविवार को सुकांत मजूमदार ने ‘केशरी हत्या’ नामक नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका निभाई। यह नाटक भारतीय जनसंघ (बीजेएस) के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और मृत्यु पर आधारित है। उन्होंने इसी नाटक में सूत्रधार (नैरेटर) की भूमिका भी निभाई।
मंत्री ने मीडिया को बताया कि उन्हें यह रोल ऑफर किया गया था और चूंकि ‘हर बंगाली के अंदर अभिनय करने की एक दबी हुई इच्छा होती है, इसलिए उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया।
लगभग आधी सदी से राज्य की खबरें कवर कर रहे वरिष्ठ पत्रकार सौम्य बंदोपाध्याय ने कहा, “अजीतदा और सुकांतबाबू के अलावा, मुझे पश्चिम बंगाल का कोई और केंद्रीय मंत्री याद नहीं आता जिसने किसी नाटक में अभिनय किया हो। हालांकि, मुझे सुब्रत मुखर्जी और हाल के दिनों में ब्रत्या बसु याद हैं, जिन्होंने मंच और सिनेमा, दोनों जगह अभिनय किया है।”
सुब्रत मुखर्जी (1946-2021) पश्चिम बंगाल के एक अनुभवी राजनेता थे। वे कांग्रेस पार्टी और बाद में तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे। उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। उन्हें एक प्रभावशाली आयोजक और प्रशासक माना जाता था, और उनका राजनीतिक करियर पांच दशकों से भी अधिक लंबा रहा।
वे कोलकाता के मेयर भी रहे और कई वर्षों तक बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
57 वर्षीय ब्रत्या बसु पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं, हालांकि मुखर्जी और बसु, दोनों में से कोई भी केंद्रीय मंत्री नहीं था और उनके अभिनय कौशल के बारे में पहले से ही काफी लोग जानते थे।
बंदोपाध्याय की बात से सहमति जताते हुए पश्चिम बंगाल के एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार गौतम होर ने कहा कि यह मंच के प्रति जुनून ही है, जो अन्य पेशों से जुड़े लोगों को शौकिया अभिनय की ओर खींच लाता है। उन्होंने कहा, “थिएटर से प्यार करने वाला कोई भी व्यक्ति मंच पर अभिनय कर सकता है, लेकिन एक मंत्री के पद पर रहते हुए ऐसा करना वाकई खास बात है। इसके लिए काफी समय चाहिए होता है, खासकर रिहर्सल के लिए।”
मजूमदार के अनुसार, उनके आधिकारिक कामकाज के बीच ही रिहर्सल होती थी और जब भी उन्हें समय मिलता, वे इसमें शामिल हो जाते थे।
–आईएएनएस
एससीएच/वीसी
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