आईआईटी रोपड़ में एआई की समझ को परखने पर जारी किया गया श्वेत पत्र

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रोपड़, 2 नवंबर (आईएएनएस)। आईआईटी रोपड़ में सोमवार को एक ‘व्हाइट पेपर’ जारी किया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संदर्भ में ‘विवेक’ को परिभाषित करने, मापने और उसका मूल्यांकन करने के लिए एक रूपरेखा का प्रस्ताव दिया गया है। इसे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के निदेशक (अनुसंधान) और ‘ग्लोबल मेंटल हेल्थ अलायंस—कंपैशन यूनाइट्स’ के संस्थापक डॉ. ईशान शिवानंद ने संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा की उपस्थिति में लॉन्च किया। ‘बियॉन्ड इंटेलिजेंस: डिफाइनिंग एंड मेजरिंग विजडम फॉर एआई’ शीर्षक वाला यह दस्तावेज बताता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ‘विवेक’ को कैसे परिभाषित, मापा और परखा जा सकता है। इसमें डॉ. शिवानंद…

रोपड़, 2 नवंबर (आईएएनएस)। आईआईटी रोपड़ में सोमवार को एक ‘व्हाइट पेपर’ जारी किया गया। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के संदर्भ में ‘विवेक’ को परिभाषित करने, मापने और उसका मूल्यांकन करने के लिए एक रूपरेखा का प्रस्ताव दिया गया है। इसे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के निदेशक (अनुसंधान) और ‘ग्लोबल मेंटल हेल्थ अलायंस—कंपैशन यूनाइट्स’ के संस्थापक डॉ. ईशान शिवानंद ने संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा की उपस्थिति में लॉन्च किया।

‘बियॉन्ड इंटेलिजेंस: डिफाइनिंग एंड मेजरिंग विजडम फॉर एआई’ शीर्षक वाला यह दस्तावेज बताता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ‘विवेक’ को कैसे परिभाषित, मापा और परखा जा सकता है। इसमें डॉ. शिवानंद द्वारा ‘शिव सूत्रों’ और मानव मन पर आधारित भारत के प्राचीन ग्रंथों की व्याख्या का उपयोग किया गया है।

मीडिया से बात करते हुए डॉ. शिवानंद ने कहा, “यह पहल इस बात पर जोर देती है कि एआई सिस्टम का मूल्यांकन केवल उनकी बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्षमताओं के आधार पर ही नहीं बल्कि सही निर्णय लेने और जिम्मेदारीपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करने की उनकी क्षमता के आधार पर भी किया जाना चाहिए।”

“हालांकि एआई सिस्टम अब पेशेवर परीक्षाएं पास कर सकते हैं और ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ (भावनात्मक बुद्धिमत्ता) के परीक्षणों में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं लेकिन अक्सर वे यूजर्स को वही बताते हैं जो वे सुनना चाहते हैं, न कि वह जो वास्तव में उनके लिए फायदेमंद हो।”

इस साल ‘साइंस’ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला देते हुए, यह व्हाइट पेपर बताता है कि “जब प्रमुख एआई सिस्टम से रोजमर्रा की सलाह मांगी गई, तो उन्होंने इंसानों की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत अधिक बार यूजर्स का ही पक्ष लिया।”

व्हाइट पेपर में तर्क दिया गया है कि भले ही एआई ने बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, लेकिन इसमें अभी भी एक जरूरी मानवीय गुण, विवेक, की कमी है।

इस कमी को दूर करने के लिए, लेखकों ने एआई सिस्टम में विवेक को मापने के लिए ‘एचईईडी’ (हीड) नामक एक फ्रेमवर्क पेश किया है।

इस पहल के तहत, डॉ. शिवानंद एक ‘ओपन कॉल’ के जरिए शुरुआती फंडिंग (सीड फंडिंग) दे रहे हैं, जिसमें स्वतंत्र शोधकर्ताओं को इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क का परीक्षण करने के लिए आमंत्रित किया गया है।

स्वतंत्र सदस्यों वाली एक समिति उन शोध टीमों का चयन करेगी जो इस मॉडल का मूल्यांकन करेंगी और ‘एचईईडी बेंच’ विकसित करेंगी। यह एआई में विवेक को मापने के लिए एक ‘ओपन बेंचमार्क’ होगा, जिसे दुनिया भर के एआई डेवलपर्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

–आईएएनएस

एससीएच/पीएम

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IANS Agency

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