नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों के पहुंचने के बीच विदेश नीति विशेषज्ञों ने शुक्रवार को कहा कि सदस्य देशों के बीच बढ़ता सहयोग भारत को पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी के विस्तार से भारत के लिए नए अवसर पैदा होंगे। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत होगी तथा पश्चिमी देशों पर अत्यधिक निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी।
आईएएनएस से बातचीत में पत्रकार और विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाएल अवाद ने कहा कि भारत, रूस और चीन के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी से जुड़े बड़े समझौतों का अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों पर सीधा प्रभाव भले ही न पड़े, लेकिन यह स्थिति काफी संवेदनशील होगी।
उन्होंने कहा, “तीन प्रमुख शक्तियों के बीच इस तरह का सहयोग भारत को पश्चिमी देशों और विशेष रूप से अमेरिका पर कम निर्भर बनाएगा। यह ऐसी स्थिति है जिससे अमेरिका और पश्चिमी देश सहज महसूस नहीं करेंगे।”
अवाद के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच बढ़ता आर्थिक और रणनीतिक सहयोग वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है और भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक स्वतंत्र तथा बहुध्रुवीय विदेश नीति अपनाने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, “रूस भारत को टेक्नोलॉजी दे रहा है, लेकिन हमने अभी तक अमेरिका से भारत को टेक्नोलॉजी का कोई ट्रांसफर होते नहीं देखा है। भारत भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट पर जोर दे रहा है। इसलिए, अगर अमेरिका या पश्चिम अपनी तकनीकी जानकारी साझा करने को तैयार नहीं हैं, तो मुझे लगता है कि इस तरह का सहयोग तीनों देशों (रूस, भारत और चीन) के लिए एक मजबूत मंच बनाने में मदद करेगा। मेरा मानना है कि अगर तीनों नेताओं में आगे बढ़ने की ईमानदारी हो, तो मतभेद, खासकर भारत और चीन के बीच, काफी कम हो जाएंगे।”
अवाद ने कहा, “ब्रिक्स समूह के बीच बैठक और सहयोग से भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार खोजने और उन्हें बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही पश्चिम पर निर्भरता भी कम होगी। मेरा मानना है कि इस बैठक के बाद जारी होने वाले साझा बयान में भारत की कूटनीतिक कुशलता दिखाई देगी।”
पूर्व राजनयिक महेश सचदेव के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन दुनिया के प्रमुख देशों के लिए रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों पर चर्चा करने और समाधान खोजने का एक मौका होगा, जिनसे दुनियाभर में भारी नुकसान हुआ है और इन प्रभावों से निपटने की सभी कोशिशें सफल नहीं रही हैं।”
ब्रिक्स में भारत की मौजूदगी एक अनोखा मौका है क्योंकि पश्चिमी देशों को इस समूह पर शक है। उन्हें लगता है कि ब्रिक्स पर चीन और रूस का दबदबा है।”
–आईएएनएस
एससीएच/वीसी
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