नई दिल्ली, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया। यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य शामिल होंगे।
यह बिल राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या पर 815 की सीमा प्रस्तावित करता है।
केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के लिए बिल में कहा गया, “केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए 35 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिनका चुनाव उस तरीके से किया जाएगा जैसा संसद कानून द्वारा निर्धारित करे।”
वर्तमान में राज्यों से लोकसभा के 530 सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हैं। हालांकि, एक परिसीमन आयोग ने यह संख्या 543 निर्धारित की थी।
बिल में एक और जरूरी बदलाव आबादी की परिभाषा है, जिससे पार्लियामेंट को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए।
संविधान के आर्टिकल 81 के क्लॉज (3) में बदलाव के लिए बिल यह प्रस्ताव करता है, “(3) इस आर्टिकल में ‘आबादी’ का मतलब ऐसी जनगणना में पता लगाई गई आबादी है, जिसे पार्लियामेंट कानून बनाकर तय कर सकती है और जिसके जरूरी आंकड़े पब्लिश हो चुके हैं।”
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में उस विधेयक को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना है। साथ ही, इसके जरिए संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव है।
संशोधन विधेयक अनुच्छेद 82 में भी परिवर्तन प्रस्तावित करता है, जिसके तहत “प्रत्येक जनगणना के पूरा होने पर, सीटों का आवंटन” स्थान पर “सीटों का आवंटन” शब्द रखे जाएंगे।
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य कोटे के कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना से अलग करना और इसके बजाय इसे 2011 की जनगणना पर आधारित करना है, जिससे 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके।
अनुच्छेद 82 में संशोधन विधेयक परिसीमन आयोग की भूमिका को भी शामिल करने का प्रस्ताव करता है।
यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं में रोटेशन के आधार पर सीटों के आरक्षण की बात भी करता है और इसमें उन अवधियों से संबंधित अनुच्छेद भी शामिल हैं, जिनके लिए महिलाओं का आरक्षण लागू रहेगा, बशर्ते संसद द्वारा इसे आगे बढ़ाया जाए।
इससे पहले, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण बिल में प्रस्तावित संशोधन में कुछ भी विवादित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस मुद्दे का राजनीतिकरण किए बिना इसका समर्थन करें।
आईएएनएस से बात करते हुए रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण किसी भी रूप में राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जा सकता। अगर हम इसे राजनीतिक रंग देते हैं, तो यह महिलाओं के साथ अन्याय होगा। प्रधानमंत्री ने दलीय राजनीति से ऊपर उठने की बहुत ही सरल और स्पष्ट अपील की है। नारी शक्ति अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) एक ऐसा कानून है, जिसका सभी दलों ने समर्थन किया और जिसे सर्वसम्मति से पारित किया। अब, हमने इसे लागू करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया है।
बता दें कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा करने और उसे पारित करने के लिए 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया है।
भाजपा ने लोकसभा और राज्यसभा में अपने सभी सांसदों के लिए तीन-लाइन का व्हिप जारी किया है, जिसमें उन्हें आगामी संसद सत्र के दौरान 16 से 18 अप्रैल तक सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
–आईएएनएस
पीएसके/एबीएम
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