कुरुक्षेत्र, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों सरकारें सिख गुरुओं के सिद्धांतों और शिक्षाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन प्रयासों से गुरु परंपरा और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार को और मजबूती मिल रही है।
मुख्यमंत्री यहां जिला प्रशासन के सहयोग से कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा आयोजित राज्य-स्तरीय बैसाखी महोत्सव में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।
बैसाखी के शुभ अवसर पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने खालसा पंथ के स्थापना दिवस पर पूजनीय गुरुओं को नमन किया।
इस अवसर पर सिख संगत द्वारा मुख्यमंत्री और गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज को सम्मान के प्रतीक के रूप में एक कृपाण और सिरोपा भेंट किया गया।
बाद में, मुख्यमंत्री ने सिख इतिहास के साथ-साथ राज्य सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं पर आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
उन्होंने पुरुषों और महिलाओं के लिए कुश्ती प्रतियोगिताओं को भी हरी झंडी दिखाई और पतंग उड़ाकर अंतर्राष्ट्रीय पतंग प्रतियोगिता का उद्घाटन किया।
उन्होंने हरियाणा हेरिटेज पवेलियन का निरीक्षण किया, जिसमें समृद्ध हरियाणवी संस्कृति को प्रदर्शित किया गया था।
इस त्योहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बैसाखी समृद्धि, श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति के साथ तालमेल का प्रतीक है।
उन्होंने धर्म और कर्म की भूमि के रूप में विख्यात कुरुक्षेत्र की इस पवित्र धरती पर उपस्थित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह त्योहार लोगों को प्रकृति से जुड़े रहने तथा भरपूर फसल की खुशी मनाने के लिए प्रेरित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक नए युग की ओर अग्रसर है और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक समावेशी समाज के निर्माण के लिए सिख गुरुओं की शिक्षाओं—एकता, समर्पण, सेवा और कड़ी मेहनत—को दैनिक जीवन में अपनाया जाना चाहिए। ऐसा समाज जहां सभी नागरिकों को समान अवसर प्राप्त हों, किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो और प्रत्येक व्यक्ति गरिमापूर्ण जीवन जी सके।
उन्होंने आगे कहा कि विकास के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना, संस्कृति को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना भी जरूरी है।
इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 1699 में इसी दिन श्री आनंदपुर साहिब में दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने ‘खालसा पंथ’ की स्थापना की थी। यह वह समय था जब अन्याय और अत्याचार अपने चरम पर थे। ऐसे में उन्होंने साहस, समानता, आत्म-सम्मान और देशभक्ति पर आधारित एक नई दिशा देकर समाज को एक नई राह दिखाई।
–आईएएनएस
एमएस/
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