धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन, वापस लौटने का सवाल ही नहीं: हुसैन दलवई

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मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर पूरी तरह अडिग हैं, जो सही है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हुसैन दलवई ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए तीनों प्रमुख मुद्दे उचित हैं और सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। शिक्षा मंत्री को किसी अन्य जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनका…

मुंबई, 25 जुलाई (आईएएनएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर पूरी तरह अडिग हैं, जो सही है। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

हुसैन दलवई ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाए गए तीनों प्रमुख मुद्दे उचित हैं और सरकार को उन्हें स्वीकार करना चाहिए। शिक्षा मंत्री को किसी अन्य जिम्मेदारी में भेजा जा सकता है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनका इस्तीफा आवश्यक है।

पेपर लीक मामलों में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सख्त कानून, जिसमें दोषियों के लिए 10 वर्ष तक की जेल और 10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है, पर प्रतिक्रिया देते हुए हुसैन दलवई ने सवाल उठाया कि सरकार ने अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की। उनका कहना था कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए गए होते, तो ऐसी स्थिति ही पैदा नहीं होती।

सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिनों का अनशन समाप्त करने के मुद्दे पर हुसैन दलवई ने कहा कि उनके अनशन की पवित्रता पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता।

उन्होंने वांगचुक के संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा जनहित के मुद्दों पर लड़ते रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के साथ निर्णय प्रक्रिया या बातचीत में उन्हें प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होना चाहिए था। उनका मानना है कि अस्पताल में दो केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अनशन समाप्त करने से गलत संदेश गया और इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा। हालांकि, उन्होंने किसी भी तरह की ‘डील’ होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वे वांगचुक के चरित्र पर कोई संदेह नहीं करते।

मोहन भागवत के उस बयान, जिसमें उन्होंने बच्चों से संवाद बढ़ाने की बात कही थी, पर टिप्पणी करते हुए हुसैन दलवई ने कहा कि यह सकारात्मक बात है, लेकिन सरकार उस दिशा में काम करती दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न आंदोलनों में प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों को बंद किए जाने पर हुसैन दलवई ने कहा कि इसके बावजूद बड़ी संख्या में युवा आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जो लोकतांत्रिक जागरूकता का संकेत है। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर युवाओं की भागीदारी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी।

दिल्ली विश्वविद्यालय और जेएनयू द्वारा छात्रों को जंतर-मंतर प्रदर्शन में जाने से रोकने के निर्देशों की भी उन्होंने आलोचना की। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों के निजी लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के कथित एआई-एडिटेड वीडियो पर उन्होंने कहा कि यदि किसी का बयान गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है, तो उसका समर्थन नहीं किया जा सकता और संबंधित व्यक्ति को स्वयं स्पष्ट रूप से अपनी बात सामने रखनी चाहिए।

–आईएएनएस

एसएके/वीसी

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