भोपाल, 10 जुलाई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश का श्योपुर एक बार फिर देश का सबसे बड़े वैज्ञानिक मिशन का गवाह बना। श्योपुर के एरियल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट यानी एडीआरडीई के ड्रॉप जोन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने गगनयान मिशन के मुख्य पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। यह सिर्फ एक पैराशूट टेस्ट नहीं बल्कि भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सफलता की दिशा में उठाया गया एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। इस परीक्षण के सफल होने से गगनयान मिशन को नई मजबूती मिली है और अंतरिक्ष में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी का भरोसा भी बढ़ा है।
भारत का ड्रीम प्रोजेक्ट गगनयान तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसी मिशन की तैयारियों के तहत श्योपुर में मुख्य पैराशूट सिस्टम का परीक्षण किया गया। परीक्षण के लिए भारतीय वायु सेना के आईएल-76 विमान का उपयोग किया गया। विमान से करीब ढाई किलोमीटर की ऊंचाई पर एक परीक्षण असेंबली को हवा में छोड़ा गया। इस असेंबली में मुख्य पैराशूट और डमी पेलोड लगाया गया था। ताकि वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थिति तैयार की जा सके।
जैसे ही असेंबली हवा में छोड़ी गई, सबसे पहले ड्रोग पैराशूट खुला। इसका काम था असेंबली को संतुलित करना और उसकी रफ्तार को नियंत्रित करना। इसके बाद मुख्य पैराशूट सक्रिय हुआ और उसने पूरे पेलोड को सुरक्षित गति के साथ जमीन तक पहुंचाया। पूरा परीक्षण तय मानकों के अनुसार सफल रहा।
इसरो के मुताबिक, इस परीक्षण का मकसद बिना चालक वाले पहले गगनयान मिशन जी1 के दौरान संभावित अधिकतम भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट सिस्टम की मजबूती और उसकी कार्यक्षमता को परखना था। इस सफल परीक्षण से यह विश्वास और मजबूत हुआ है कि अंतरिक्ष से लौटते समय गगनयान क्रू मॉड्यूल सुरक्षित तरीके से धरती पर उतर सकेगा। यह परीक्षण इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट, यानी आईएमएटी, श्रृंखला का पांचवां सफल परीक्षण है। इसरो लगातार अलग-अलग परिस्थितियों में पैराशूट सिस्टम की जांच कर रहा है। ताकि मिशन के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी चुनौती का सामना किया जा सके। गगनयान क्रू मॉड्यूल में कुल 10 पैराशूट लगाए गए हैं। सभी की जिम्मेदारी अलग-अलग है। कुछ पैराशूट मॉड्यूल के सुरक्षा कवर को अलग करते हैं।
कुछ उसकी गति कम करते हैं, कुछ मुख्य पैराशूट को बाहर निकालते हैं और अंत में मुख्य पैराशूट मॉड्यूल को सुरक्षित गति से धरती पर उतारते हैं। यानी पूरी पैराशूट प्रणाली कई चरणों में काम करती है और हर चरण मिशन की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। श्योपुर में हुआ यह सफल परीक्षण केवल जिले के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। जिस धरती पर यह परीक्षण हुआ, वहीं से भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी तकनीकी परीक्षा सफलतापूर्वक पूरी हुई। अब गगनयान मिशन की तैयारियां और तेज होंगी और देश उस ऐतिहासिक पल का इंतजार करेगा जब भारतीय अंतरिक्ष यात्री स्वदेशी तकनीक से अंतरिक्ष की यात्रा कर सुरक्षित वापस लौटेंगे।
–आईएएनएस
एमएस/
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