“इलाज के साथ-साथ प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर भी जोर…”, ILBS के दीक्षांत समारोह में बोले जेपी नड्डा

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ILBS Ceremony : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के 10वें दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है जो चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि आज देश में इलाज के साथ-साथ प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। आईएलबीएस जैसी विश्वस्तरीय संस्था से डिग्री प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गर्व का विषय है। संस्थान…

ILBS Ceremony : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) के 10वें दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत का स्वास्थ्य तंत्र केवल अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है जो चिकित्सा शिक्षा, शोध, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा।

उन्होंने कहा कि आज देश में इलाज के साथ-साथ प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है। आईएलबीएस जैसी विश्वस्तरीय संस्था से डिग्री प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गर्व का विषय है। संस्थान ने मरीजों की देखभाल, मेडिकल एजुकेशन, रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

उन्होंने कहा कि आईएलबीएस फैटी लिवर जैसी तेजी से बढ़ रही बीमारी को लेकर देशभर में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है। संस्थान की क्लीनिकल सेवाओं, शोध और जनजागरूकता अभियानों के कारण लोगों में बीमारी के जोखिम, बचाव और दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर समझ बढ़ी है।

मेडिकल शिक्षा के विकास के लिए ‘हार्डवेयर’ और ‘सॉफ्टवेयर’ दोनों पर समान रूप से काम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने मेडिकल शिक्षा के विकास के लिए “हार्डवेयर” और “सॉफ्टवेयर” दोनों पर समान रूप से काम किया है। हार्डवेयर के तहत आधुनिक मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया, जबकि सॉफ्टवेयर के रूप में नीतिगत सुधार, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और शोध को बढ़ावा देने वाला इकोसिस्टम तैयार किया गया।

उन्होंने बताया कि एक समय देश में केवल एक एम्स था, जबकि आज 23 एम्स कार्यरत हैं। इसी तरह मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 818 हो गई है। एमबीबीएस सीटें करीब 50 हजार से बढ़कर 1.20 लाख से अधिक और पीजी सीटें 30 हजार से बढ़कर 80 हजार से ज्यादा हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में 75 हजार नई मेडिकल सीटें जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से लगभग 25 हजार सीटें पहले ही जोड़ी जा चुकी हैं।

देशभर में 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर

नड्डा ने कहा कि 140 करोड़ से अधिक आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए देशभर में 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोगों की समय पर पहचान और रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अब तक 42 करोड़ से अधिक लोगों की उच्च रक्तचाप और मधुमेह की जांच की जा चुकी है, जबकि करोड़ों लोगों की ओरल, स्तन और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग भी की गई है। इन जांच अभियानों के जरिए लाखों मरीजों की समय रहते पहचान संभव हुई है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि भारत अब बीमारी के इलाज के साथ-साथ उसकी रोकथाम पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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Avinay