कब है अनंत चतुर्दशी? जानें पूजन मुहूर्त, व्रत और अनंत सूत्र बांधने की मान्यता

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नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व खास माना जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। पूजन मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। अनंत चतुर्दशी का व्रत को करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों के नाश होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला…

नई दिल्ली, 22 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में अनंत चतुर्दशी का पर्व खास माना जाता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। पूजन मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात्रि 11:06 बजे तक रहेगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है। गणेश उत्सव का समापन भी अनंत चतुर्दशी पर होता है। अनंत चतुर्दशी का व्रत को करने से अनंत सुख की प्राप्ति होती है और पापों के नाश होता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, अनंत चतुर्दशी पर अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनंत सूत्र बांधा जाता है। अनंत सूत्र में 14 गांठें होनी चाहिये, इन 14 गांठों को 14 लोकों से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है, जब पाण्डव धृत क्रीड़ा में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनंत सूत्र धारण किया। अनंत चतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पांडव सब संकटों से मुक्त हो गए थे।

अनंत चतुर्दशी पर प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करें। शास्त्रों में व्रत का संकल्प एवं पूजन किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर करने का विधान है। हालांकि ऐसा संभव न हो सकने की स्थिति में घर में पूजागृह की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित करें। कलश पर शेषनाग की शैय्या पर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को रखें। उनके समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनंत सूत्र रखें। इसके बाद ‘ॐ अनन्तायनम:’ मंत्र से भगवान विष्णु और अनंत सूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजा करें। पूजन के बाद अनंत सूत्र को मंत्र पढकर पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें। अनंत सूत्र बांध लेने के बाद किसी ब्राह्मण को नैवेद्य (भोग) में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें।

अनंत चतुर्दशी पर गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव समापन भी होता है। घरों और पंडालों में स्थापित गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने के साथ कई जगहों पर गणपति विसर्जन भी होगा।

–आईएएनएस

ओपी/पीएम

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IANS Agency

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