मिजोरम के चम्फाई जिले के जोटलांग इलाके में 666 अंक का डर फैला हुआ है जिसके चलते आधार कार्ड का पंजीकरण करान के लिए मना कर दिया गया है। छोटी ईसाई समुदाय ने सरकारी पहचान व्यवस्था से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। क्योंकि इनका मानना है कि आधार कार्ड का पंजीकरण शैतान के चिन्ह की शुरुआत है। बता दें कि यहां कुल सदस्य संख्या करीब 67 बताई जाती है। इनमें लगभग 30 से 40 लोग मतदाता बनने के योग्य हैं, जबकि 20 से अधिक नाबालिग हैं।
666 अंक का डर
SIR को लेकर देशभर के राज्य मे जांच जारी है। ऐसे में यह ईसाई धर्म के लोग मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से मना कर रहे हैं। इनका विरोध SIR में कमी या दूरी नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था से जुड़ी हुई है। जहां बाइबिल की पुस्तक ‘रहस्योद्घाटन’ के अध्याय 13, पद 18 में 666 को ‘पशु की संख्या’ या ‘बिस्ट का नंबर’ कहा गया है। कई ईसाई परंपराओं में इसे शैतान से भी जोड़ा जाता है जिससे समुदाय के सदस्यों का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में नाम दर्ज होने से वे उसी व्यवस्था का हिस्सा बन सकते हैं, जिसे वे धार्मिक रूप से नहीं मानते हैं।
आस्था से जुड़ा है 666 अंक
666 अंक के डर के साये में सदस्य आधार कार्ड, बैंक खाता, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और बच्चों के स्कूल दाखिला भी नहीं करा रहे है। इन समुदाय के लोगों के लिए पहचान पत्र सिर्फ वोट देने या जरूरी दस्तावेज का साधन नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ा है। इस डर का साय को कम करने औऱ लोगों को समझाने के लिए की मुख्य निर्वाचन अधिकारी गरिमा गुप्ता आइजोल से चम्फाई गईं औऱ यह रास्ता करीब 194 किलोमीटर का है जिसमें सात घंटे का समय लगता है। उनके साथ संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी एथेल रोथांगपुई तथा स्थानीय चुनाव अधिकारी भी थे।
दस्तावेज विश्वास का प्रश्न बना
सदस्यों ने साफ कहा कि वे मतदाता सूची में अपना नाम नहीं चाहते। SIR के दौरान मिजोरम में धार्मिक कारणों से नाम दर्ज कराने से इनकार करने वाले लोगों की संख्या इससे बड़ी बताई गई है। जून 2026 में अधिकारियों ने कहा था कि 312 पात्र लोग धार्मिक विश्वास के कारण रजिस्ट्रेशन नहीं करा रहे है। इस छोटे समूह के लिए वही दस्तावेज विश्वास का प्रश्न बन गया है। अधिकारियों ने समुदाय की चिंता समझने की कोशिश की है, लेकिन फिलहाल नाम जोड़ने पर सहमति नहीं बनी है।


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