Modi Cabinet Reshuffle : 20 नए चेहरों की एंट्री! युवाओं पर फोकस, कई दिग्गजों के बदले जा सकते हैं मंत्रालय

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विदेश दौरे से लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल कर सकते हैं। 'जेन जी' आंदोलन और आगामी चुनावों को देखते हुए लगभग 20 नए और युवा चेहरों को मौका मिलने और कई दिग्गजों के मंत्रालय बदलने के आसार हैं।

Modi Cabinet Reshuffle

Modi Cabinet Reshuffle : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चार दिवसीय मध्य एशिया दौरे से राजधानी लौटते ही देश के राजनीतिक गलियारों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के स्वदेश आगमन के तुरंत बाद परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। इसके साथ ही, आने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों और भविष्य की रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए मोदी कैबिनेट में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल किए जाने की पूरी संभावना है।

जेनजी का असर

दरअसल, पिछले दो महीनों में देश का सियासी माहौल काफी बदला है। 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए ‘जेन जी’ आंदोलन के बाद सभी राजनीतिक दलों को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

युवा वर्ग और नई पीढ़ी की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए सत्ताधारी दल भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस फेरबदल के जरिए लगभग 20 से अधिक नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है, जिसमें महिलाओं और युवाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है।

क्या है मौजूदा स्थिति

मौजूदा आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र सरकार में प्रधानमंत्री समेत कुल 69 मंत्री हैं, जिनमें 29 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 34 राज्य मंत्री शामिल हैं। नियमों के मुताबिक अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसका मतलब है कि 12 पद पहले से ही सीधे तौर पर खाली पड़े हैं।

इसके अलावा, हाल ही में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कूरियन और रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के इस्तीफे के बाद खाली हुई जगहों को भी भरा जाना बाकी है। अगर कमजोर प्रदर्शन करने वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी होती है, तो नए चेहरों की संख्या दो दर्जन के करीब पहुंच सकती है।

अश्विनी वैष्णव और नितिन गडकरी चर्चा में क्यों?

फिलहाल टीम के 14 ऐसे मंत्री हैं जो एक से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अश्विनी वैष्णव वर्तमान में रेलवे, सूचना एवं प्रसारण और आईटी जैसे तीन बड़े भारी-भरकम मंत्रालय संभाल रहे हैं। चर्चा है कि उनके काम को देखते हुए उन्हें सरकार के कोर ग्रुप में और बड़ा रोल दिया जा सकता है, जबकि उनके कुछ विभागों का बोझ कम किया जा सकता है।

दूसरी तरफ, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मंत्रालय में बदलाव या उनकी जिम्मेदारियों को सीमित करने की अटकलें लगाई जा रही हैं। E20 पेट्रोल जैसे कुछ विवादित मुद्दों पर बने राजनीतिक दबाव को कम करने के लिए सरकार यह कदम उठा सकती है। इसी तरह, शिक्षा मंत्रालय के लिए भी पूर्णकालिक मंत्री की नियुक्ति तय मानी जा रही है, जिसका अतिरिक्त प्रभार फिलहाल प्रह्लाद जोशी के पास है।

फिलहाल ब्रिक्स पर जोर

संगठनात्मक स्तर पर भी बीजेपी में कई बड़े बदलावों की तैयारी चल रही है। सितंबर महीने में बीजेपी के शीर्ष नीति-निर्धारक मंच पार्लियामेंट्री बोर्ड का पुनर्गठन हो सकता है। किसी भी मुख्यमंत्री को इसमें शामिल न करने की योजना है ताकि बाकी मुख्यमंत्रियों के बीच संतुलन बना रहे। इसके साथ ही पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई टीम भी सामने आएगी।

फिलहाल प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन पर है, जिसमें रूस और चीन के राष्ट्रपतियों समेत कई शीर्ष वैश्विक नेता हिस्सा लेंगे। 8 सितंबर को गुजरात के नवसारी और वडोदरा दौरे के बाद, जैसे ही ब्रिक्स सम्मेलन समाप्त होगा, मोदी केबिनेट के इस बड़े फेरबदल पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।