मॉनसून सत्र में बदलेगा लोकसभा का गणित, TMC के 20 बागी सांसद बैठेंगे अलग, शिंदे की शिवसेना की बढ़ेगी ताकत

Summary :

संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार सदन में केवल विधायी एजेंडा ही नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण भी बदले हुए नजर आएंगे। लोकसभा में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) का संख्याबल घटेगा, जबकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ताकत बढ़ जाएगी। लोकसभा सचिवालय के हालिया फैसलों के बाद सदन का सीटिंग अरेंजमेंट भी बदलने जा रहा है। छह सांसदों के विलय को मिली मंजूरी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय…

संसद का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, लेकिन इस बार सदन में केवल विधायी एजेंडा ही नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरण भी बदले हुए नजर आएंगे। लोकसभा में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) का संख्याबल घटेगा, जबकि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ताकत बढ़ जाएगी। लोकसभा सचिवालय के हालिया फैसलों के बाद सदन का सीटिंग अरेंजमेंट भी बदलने जा रहा है।

छह सांसदों के विलय को मिली मंजूरी

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो जाएगी। इससे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को सदन में और मजबूती मिलने की संभावना है।

TMC के 20 बागी सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था

लोकसभा अध्यक्ष ने तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए 20 सांसदों के लिए भी सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की अनुमति दे दी है। हालांकि इन सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के संसदीय दल के रूप में औपचारिक दर्जे पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है और मामला विचाराधीन है।

इन सांसदों के अलग बैठने के फैसले के बाद लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की प्रभावी संख्या घट जाएगी और विपक्षी खेमे की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सर्वदलीय बैठक में NCPI को भी मिला न्योता

मॉनसून सत्र से पहले रविवार को होने वाली सर्वदलीय बैठक के लिए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने NCPI को भी अलग से आमंत्रित किया है। इसे बागी गुट के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष ने फैसला लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल और बागी सांसदों से अलग-अलग मुलाकात की थी। इसी तरह की प्रक्रिया शिवसेना (UBT) के मामले में भी अपनाई गई। सूत्रों के अनुसार, निर्णय से पहले संवैधानिक और कानूनी विशेषज्ञों की राय ली गई तथा पूर्व में ऐसे मामलों में दिए गए फैसलों का भी अध्ययन किया गया।

DMK ने भी मांगी अलग सीटिंग

लोकसभा में सीटिंग व्यवस्था को लेकर केवल TMC और शिवसेना (UBT) ही नहीं, बल्कि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने भी कांग्रेस से अलग बैठने की मांग की है। यह मांग कांग्रेस और DMK के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक गठबंधन के टूटने के बाद सामने आई है।

यदि लोकसभा अध्यक्ष इस मांग को भी स्वीकार कर लेते हैं, तो मॉनसून सत्र में विपक्षी दलों की बैठने की व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी अलग दिखाई देगी।

TMC को सबसे बड़ा झटका

2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर 29 सांसद चुने गए थे। इनमें से 20 सांसद पार्टी छोड़कर NCPI के साथ जुड़ गए। यह पार्टी पश्चिम बंगाल के हावड़ा में पंजीकृत, लेकिन अभी गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है।

बागी गुट ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रति समर्थन जताने के साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की है। इस गुट में सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष, सयानी घोष, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय और माला रॉय जैसे सांसद शामिल बताए जा रहे हैं।

इन घटनाक्रमों के बाद संसद में तृणमूल कांग्रेस की संख्या और राजनीतिक प्रभाव दोनों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के लिए चुनौती माना जा रहा है।

उद्धव ठाकरे की पार्टी भी हुई कमजोर

शिवसेना (UBT) को भी इस घटनाक्रम से बड़ा झटका लगा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के नौ सांसद चुने गए थे, लेकिन अब उनमें से छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो चुके हैं।

शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय जाधव, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टीकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल हैं। अब उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास लोकसभा में केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ—ही बचे हैं।

दल-बदल कानून को लेकर उठे सवाल

तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) दोनों ने अपने बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। दोनों दलों का कहना है कि यह मामला दल-बदल विरोधी कानून के दायरे में आता है। उनका तर्क है कि किसी दल के सांसदों को अयोग्यता से तभी छूट मिल सकती है, जब पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ विलय का निर्णय लें।

हालांकि लोकसभा अध्यक्ष के फैसले के बाद फिलहाल दोनों मामलों में संसदीय स्थिति स्पष्ट हो गई है, लेकिन राजनीतिक और कानूनी बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। मॉनसून सत्र में इन बदले हुए समीकरणों का असर सदन की कार्यवाही और विपक्ष की रणनीति दोनों पर देखने को मिल सकता है।

Shera Rajput