सफाई कर्मचारियों को सम्मान प्रदान करने और उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए ‘नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम (नमस्ते)’ योजना शुरू की गई थी। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने बुधवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा। देश के सभी 4800 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों में इसके कार्यान्वयन के लिए इस योजना को 2023-24 में लॉन्च किया गया है। नमस्ते योजना का लक्ष्य भारत में सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना है, इसके लिए एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है, जो सफाई कर्मचारियों को स्वच्छता बुनियादी ढांचे के संचालन और रखरखाव में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक के रूप में मान्यता देता है, जिससे स्थायी आजीविका प्रदान की जा सके और उनके व्यावसायिक सुरक्षा को बढ़ाया जा सके।
क्षमता निर्माण और सुरक्षा गियर और मशीनों तक बेहतर पहुंच। सफाई कर्मचारियों की कमजोरियों को कम करने और उन्हें स्वरोजगार तक पहुंचने में सक्षम बनाने के लिए अधिकारों और आजीविका सहायता तक पहुंच प्रदान करना मंत्री ने कहा कि स्वच्छता से संबंधित परियोजनाओं के लिए पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करना ताकि उन्हें ‘सैनिप्रिन्योर’ बनाया जा सके और व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण और पीपीई किट प्राप्त करने के बाद कुशल वेतन रोजगार के अवसर प्रदान करना भी इसका लक्ष्य है।
इसके अलावा, नमस्ते स्वच्छता कर्मचारियों के प्रति नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाएगा। और सुरक्षित स्वच्छता सेवाओं की मांग में वृद्धि, क्योंकि सभी सेवा चाहने वालों को सीवर सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए एसआरयू से संपर्क करना पड़ता है, किसी भी अनौपचारिक कार्यकर्ता को ऐसा काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सीवर से संबंधित सभी कार्यों का मशीनीकरण आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के दायरे में आता है। शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने समय-समय पर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सीवर और सेप्टिक टैंकों के रखरखाव के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं, आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSU) की स्थापना और मशीनरी आवश्यकताओं पर व्यापक सलाह और दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


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